सिल्ट और पानी से दबाव बढ़ा, बिजली उत्पादन भी हुआ 50 फीसदी कम
डैम में दिख रही डिफ्लेक्शन पूरी तरह सामान्य, कोई खतरा नहीं
जलस्तर 1672.75 फीट पर पहुंचा, 94 फीसदी भरा जलाशय
बांध में रखा गया है पानी के लोड के हिसाब से डिफ्लेक्शन का प्रावधान
तरूणेश शर्मा
श्री नयना देवी जी (बिलासपुर)। भाखड़ा बांध इन दिनों अपने पूरे कद का प्रदर्शन कर रहा है। गोबिंद सागर जलाशय का जलस्तर गुरुवार को 1672.75 फीट दर्ज किया गया, जो पिछले साल की इसी तारीख से 39.27 फीट ज्यादा है। जलाशय की क्षमता का 94 फीसदी हिस्सा भर चुका है और सिर्फ 0.34 बीसीएम यानी 6 फीसदी जगह खाली बची है। अधिकतम भराव स्तर 1685 फीट से अभी भी करीब 12 फीट नीचे है। दिसंबर में पंजाब की नहरों की मरम्मत शुरू होगी। इसलिए नहरों में पानी नहीं छोड़ा जाएगा। तब जलस्तर भी बढ़ेगा और दवाब भी बढ़ेगा, लेकिन यह सब डिजायन का हिस्सा है। इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है।
इस असामान्य रूप से ऊंचे जलस्तर के कारण डैम में डिफ्लेक्शन (झुकाव) देखा जा रह है, जो पिछले कुछ दिनों से चर्चा का विषय बना है। जानकारी के मुताबिक यह डिफ्लेक्शन बिल्कुल नॉर्मल है। जब भी कोई बड़ी संरचना बनाई जाती है, उसमें पानी के लोड के हिसाब से डिफ्लेक्शन का प्रावधान पहले से रखा जाता है। भाखड़ा जैसे बड़े बांध में यह तो होता ही रहता है। यह कोई नई बात नहीं है और न ही इससे कोई खतरा है। बताया जा रहा है कि इस साल मानसून के बाद से जलस्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है। इसके साथ ही गोबिंद सागर झील में करीब तीन लाख मीट्रिक टन सिल्ट जमा हो चुकी है, जो हर साल बढ़ रही है। पानी के साथ सिल्ट का भी दबाव बांध पर पड़ रहा है। इसी वजह से डिफ्लेक्शन थोड़ा ज्यादा दिखाई दे रहा है। जलस्तर के हिसाब से डैम की फ्लेक्चुअलिटी (लचीलापन) और डिफ्लेक्शन अपने आप होती रहती है। यह डिजाइन का हिस्सा है।
भाखड़ा बांध का मुख्य काम सिंचाई है, बिजली उत्पादन उसका दूसरा उद्देश्य है। गर्मियों में पीक सीजन में 800 से 900 मेगावाट तक बिजली बनती थी, लेकिन इस समय सिंचाई की डिमांड लगभग खत्म होने से सिर्फ 300-400 मेगावाट ही बन पा रही है। इससे आय में करीब 50 फीसदी की कमी आई है। गर्मियों में रोजाना 25,000 क्यूसेक तक पानी सिंचाई के लिए छोड़ा जाता था, जबकि अभी सिर्फ 17,338 क्यूसेक ही छोड़ा जा रहा है। बरसात में पंजाब की कई बड़ी नहरें टूट गई थीं। दिसंबर से उनकी मरम्मत शुरू होगी। मरम्मत के दौरान नहरों में पानी नहीं डाला जा सकेगा, इसलिए डिस्चार्ज और कम हो जाएगा। इससे जलस्तर में और थोड़ी बढ़ोतरी होगी और डैम पर दबाव भी बढ़ेगा, लेकिन यह सब डिजाइन के अंदर ही है। घबराने की कोई जरूरत नहीं है। फिलहाल भाखड़ा डैम पूरी तरह सुरक्षित है और सभी पैरामीटर सामान्य दायरे में हैं।
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क्या है डिफ्लेक्शन और रिफ्लेक्शन
डिफ्लेक्शन का मतलब होता है किसी संरचना का दबाव या भार पड़ने पर हल्का झुकना या विक्षेपित होना। जब बांध पर पानी का दबाव या अन्य भार (जैसे मिट्टी, सिल्ट) पड़ता है, तो बांध की दीवार थोड़ी सी आगे या पीछे झुक सकती है। यह झुकाव बहुत छोटा होता है और इसे सुरक्षा के अनुसार डिजाइन किया जाता है। सभी बड़े बांधों में यह सामान्य है और इसे निर्माण के दौरान संरचना की क्षमता में शामिल किया जाता है। रिफ्लेक्शन का मतलब होता है संरचना में होने वाले दबाव की प्रतिक्रिया। जब बांध पर दबाव आता है, तो बांध की सामग्री उस दबाव को पलटाव के रूप में बाहर भेजती है, यानी वह दबाव बांध में फैलता है और बांध का संतुलन बना रहता है। इसे कभी-कभी स्ट्रक्चरल रिफ्लेक्शन भी कहा जाता है।
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सिल्ट निकालने की टेंडर प्रक्रिया जारी
सिल्ट निकालने का टेंडर प्रक्रियाधीन है। लेकिन इसके लिए राज्य सरकारों की अनुमति जरूरी है। इस वजह से प्रक्रिया में थोड़ा समय लग रहा है। जैसे ही मंजूरी मिलेगी इसे पूरा कर दिया जाएगा। संवाद