कहा, खैर पेड़ों की निशानदेही नहीं कराने से किसानों को उठाना पड़ रहा नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। प्रदेश सरकार और वन विभाग जिले के किसानों के हितों से खिलवाड़ कर रहा है। करीब पौने दो साल बाद भी वन विभाग लोगों की निजी भूमि में खड़े खैरों के पेड़ों की निशानदेही नहीं करवा पाया है। इस कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। विभागीय लापरवाही के कारण किसानों को अपने खैर के पेड़ बेचने के लिए 10 साल और इंतजार करना पड़ेगा। यह बात भाजपा किसान मोर्चा मंडल घुमारवीं के अध्यक्ष और पूर्व पंचायत प्रधान देसराज शर्मा ने कहीं।
उन्होंने कहा कि सरकार के नियमों के तहत हर 10 साल बाद प्रदेश के विभिन्न वन खंडों में लोगों को अपनी निजी भूमि से खैर के पेड़ बेचने की इजाजत मिलती है। इसी कड़ी में घुमारवीं, झंडूता और समोह वन खंड में साल 2022-23 में खैर के पेड़ों का कटान होना था। इसके लिए वन विभाग के डीएफओ ने 8 अप्रैल को संबंधित वन खंड अधिकारियों को इसके बारे में पत्र लिखकर आगामी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। अभी तक लोगों की निजी भूमि की निशानदेही नहीं हो पाई है, जबकि वित्त वर्ष को पूरा होने में सिर्फ चार महीने शेष रह गए हैं। निशानदेही न होने के कारण किसान अपनी इस नकदी फसल को नहीं बेच पा रहे हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि निर्धारित समय तक निशानदेही और खैर के पेड़ों का कटान नहीं किया गया तो किसानों को अगले दस साल और इंतजार करना पड़ेगा। उन्होंने चेताया कि यदि शीघ्र किसानों की सुध नहीं ली गई तो वह किसानों के साथ मिलकर आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।