शिक्षा, विवाह और चिकित्सा सहायता से कम हुआ आर्थिक बोझ
एमबीबीएस से एमएससी तक की पढ़ाई के लिए मिल रही मदद
जिले में 503 छात्रों को 1.48 करोड़, 968 परिवारों को विवाह के लिए मिले पांच करोड़
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। रोजाना मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाले निर्माण श्रमिकों के लिए हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड की योजनाएं राहत बन रही हैं। शिक्षा, विवाह और चिकित्सा सहायता जैसी योजनाओं से श्रमिक परिवारों का आर्थिक बोझ कम हुआ है। वहीं, सीमित आय के बावजूद बच्चों की उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य का सपना भी साकार हो रहा है। बिलासपुर जिले के कई परिवार इन योजनाओं का लाभ लेकर आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं।
घुमारवीं की फटोह पंचायत के रोपा निवासी 56 वर्षीय रवि दत्त करीब 25 वर्षों से पेंट और मजदूरी का कार्य कर रहे हैं। करीब 10 वर्ष पहले उन्होंने भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड में पंजीकरण कराया। इसके बाद से उनके परिवार को बोर्ड की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल रहा है। रवि दत्त बताते हैं कि उनके बच्चों को स्कूली शिक्षा के दौरान छात्रवृत्ति मिली। उनकी एक बेटी ने एमएससी तक पढ़ाई पूरी की। उसके विवाह के लिए बोर्ड से 60 हजार रुपये की सहायता मिली। दूसरी बेटी डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में एमबीबीएस की कर रही हैं। उसकी पढ़ाई के लिए इस वर्ष बोर्ड ने 1.20 लाख रुपये की शिक्षा सहायता मिली है। उनका बेटा भी बीएससी पूरी कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रवि दत्त का कहना है कि यदि बोर्ड की आर्थिक सहायता नहीं मिलती तो बच्चों की उच्च शिक्षा और बेटी का विवाह कराना उनके लिए बेहद कठिन होता।
घुमारवीं के वार्ड नंबर-3 निवासी कृष्ण चंद पिछले 40 वर्षों से पेंट का काम कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। वर्ष 2013 में बोर्ड में पंजीकरण कराने के बाद उनके बच्चों को छात्रवृत्ति का लाभ मिलता रहा। उनकी संतानों ने बीकॉम, पॉलिटेक्निक और बीबीए जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त की। बेटी के विवाह के लिए 51 हजार रुपये और बेटे को छात्रवृत्ति के रूप में 11 हजार रुपये की सहायता मिली। चिकित्सा सहायता योजना के तहत इलाज का खर्च भी काफी हद तक कम हुआ।
दोनों लाभार्थियों का कहना है कि इन योजनाओं ने केवल आर्थिक सहयोग ही नहीं दिया, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य को भी नई दिशा दी है। सीमित आय वाले श्रमिक परिवारों के लिए यह सहायता किसी मजबूत संबल से कम नहीं है।
जिले में कामगार कल्याण बोर्ड की विवाह सहायता योजना के तहत अब तक 968 लाभार्थियों को करीब पांच करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है। शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत 503 लाभार्थियों को लगभग 1.48 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई बीच में छूटने की आशंका कम हुई है और श्रमिक परिवारों को सामाजिक सुरक्षा भी मिली है।
-राहुल कुमार, उपायुक्त
प्रदेश सरकार निर्माण श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। जिले में करीब 50 हजार निर्माण श्रमिक बोर्ड में पंजीकृत हैं, जो इन योजनाओं पर बढ़ते भरोसे का प्रमाण है। सरकार भविष्य में भी श्रमिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए इसी प्रकार कार्य करती रहेगी।
-राजेश धर्माणी, नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री