एमएसीटी घुमारवीं ने चालक की लापरवाही मानी, बीमा कंपनी को भुगतान के आदेश
पत्नी को 5,04,680 रुपये, दोनों बेटों को 44-44 हजार रुपये मिलेंगे
बस मालिक-चालक जिम्मेदार, लेकिन मुआवजा राशि बीमा कंपनी करेगी जमा
2018 में हुआ था हादसा, आय साबित न होने पर न्यूनतम मजदूरी के आधार पर तय हुई क्षतिपूर्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) घुमारवीं के न्यायाधीश की अदालत ने वर्ष 2018 में स्कूल बस की टक्कर से हुई व्यक्ति की मौत के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मृतक की पत्नी को 5,04,680 रुपये तथा दोनों बेटों को 44-44 हजार रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। अदालत ने यह भी निर्देश दिए कि पूरी राशि पर याचिका दायर करने की तिथि से भुगतान तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिया जाएगा। मुआवजा राशि बस मालिक और चालक संयुक्त रूप से देने के जिम्मेदार होंगे, जबकि भुगतान बीमा कंपनी द्वारा किया जाएगा।
मामले के अनुसार 5 सितंबर 2018 को श्याम लाल अपने भाई के साथ स्कूटी पर गांव टकरेड़ा (गेहरी) में शोक सभा में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान रच्छेड़ा की ओर से आ रही निजी स्कूल घुमारवीं की बस तेज गति और लापरवाही से पास से निकली। स्कूटी चालक ने वाहन सड़क से किनारे कर लिया, लेकिन बस का हिस्सा पीछे बैठे श्याम लाल से टकरा गए। टक्कर के दौरान उनका सिर बस के कंडक्टर साइड से टकराया और वह सड़क पर गिरकर बेहोश हो गए। उन्हें तुरंत उसी बस से सिविल अस्पताल घुमारवीं ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पुलिस थाना घुमारवीं में चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी और बाद में चालान भी पेश किया गया। बस मालिक और चालक ने अदालत में दावा किया था कि दुर्घटना बस से नहीं हुई। उनका कहना था कि मृतक पहले से सड़क पर घायल अवस्था में पड़ा था और स्कूटी चालक के कहने पर मानवीय आधार पर उसे अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं बीमा कंपनी ने भी कई तकनीकी आपत्तियां उठाईं, जिनमें वाहन दस्तावेज और चालक लाइसेंस संबंधी दलीलें शामिल थीं। हालांकि अदालत ने साक्ष्यों, एफआईआर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शी गवाह के बयान के आधार पर माना कि दुर्घटना बस चालक की लापरवाही से ही हुई।
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि मृतक सर्विस स्टेशन, व्यावसायिक आटा चक्की और छह बीघा बागवानी से 60 हजार रुपये मासिक कमाते थे। लेकिन अदालत ने पाया कि आय संबंधी ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। इसलिए हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी (240 रुपये प्रतिदिन) को आधार बनाकर आय का आकलन किया गया। मृतक की आयु करीब 59 वर्ष होने के कारण भविष्य संभावनाओं के तहत 10 प्रतिशत वृद्धि जोड़ी गई। अदालत ने पाया कि दोनों बेटे वयस्क और अपने-अपने काम में स्थापित थे, इसलिए केवल पत्नी को आश्रित माना गया और व्यक्तिगत खर्च की 50 प्रतिशत कटौती की गई। इसके बाद 9 के गुणक (मल्टीप्लायर) से आश्रित हानि की गणना की गई। अदालत ने आश्रित हानि के अलावा अंतिम संस्कार खर्च, संपत्ति हानि और पारिवारिक स्नेह (कंसोर्टियम) के तहत भी राशि प्रदान की। पत्नी को कुल 5,04,680 रुपये तथा दोनों बेटों को 44-44 हजार रुपये कंसोर्टियम के रूप में देने के आदेश दिए गए।
इनसेट
बीमा कंपनी करेगी भुगतान
रिकॉर्ड में बीमा पॉलिसी दुर्घटना की तिथि पर वैध पाई गई। चालक का लाइसेंस भी अवैध साबित नहीं हो सका। ऐसे में ट्रिब्यूनल ने निर्णय दिया कि बस मालिक और चालक संयुक्त रूप से जिम्मेदार होंगे, लेकिन बीमा कंपनी मुआवजा राशि जमा करेगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई अंतरिम मुआवजा पहले दिया गया है तो उसे अंतिम राशि में समायोजित किया जाएगा।