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मायके वाले कर रहे थे अख्तरी के आने का इंतजार, मगर आई उनकी की मौत की खबर

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बिलासपुर (रामपुर)। हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना की अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट से जान गंवाने वाली अख्तरी बेगम हर साल शीरी बाबा के उर्स के मौके पर कुंडे मनाने अपने मायके बिलासपुर आती थीं। इस बार भी मायके वाले बेटी के आने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन वह नहीं आ सकीं। बल्कि मंगलवार को उनकी और पुत्री की मौत की खबर आई, तो सभी मायके वाले गमजदा हो गए। इसके बाद मायके पक्ष के लोग भी अख्तरी (45) के जनाजे में शामिल होने के लिए हिमाचल प्रदेश रवाना हो गए हैं। अख्तरी आखिरी बार अक्तूबर 2021 को बिलासपुर आईं थीं।
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मायके वालों के मुताबिक, नगर के मोहल्ला शीरी मियां निवासी हसमत अली माहीगीर ने अपनी पुत्री अख्तरी बेगम की शादी मुरादाबाद जिले के मूंढापांडे निवासी अनवर हुसैन के साथ की थी। अनवर पत्नी अख्तरी व नौ बच्चों को लेकर करीब 20 साल पहले से हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में रह रहे हैं। वह वहां अपने परिवार के साथ मजदूरी करते हैं। अनवर के पुत्र अबरार हुसैन ने बताया कि उसकी मां अख्तरी और बहन अनवता उर्फ भूरी एक पटाखा फैक्टरी में मजदूरी करती थीं। 22 फरवरी दोपहर हुए विस्फोट में अख्तरी और अनवता की मौत हो गई। इसकी सूचना मंगलवार शाम को अख्तरी के मायके में उनके भाई अख्तर व मां अनवरी को मिली तो कोहराम मच गया। भाई अख्तर परिवार के सभी सदस्यों को लेकर शाम को ही घर में ताला लगाकर हिमाचल प्रदेश के लिए रवाना हो गए। पूरे मोहल्ले में अख्तरी की मौत को लेकर चर्चाएं चलती रहीं। लोग उनके व्यवहार की तारीफ कर रहे थे।
बुधवार सुबह अख्तरी के भाई अख्तर के घर पर ताले लगे हुए थे। घर के बाहर मिले उनके चचेरे भाई महमूद, चचेरी ननद छोटी बेगम, भाई कासिम, भतीजे इकबाल आदि ने बताया कि अख्तरी और उनके सभी परिवार का व्यवहार उनके प्रति बहुत ही अच्छा था। वह हर साल शीरी बाबा के उर्स के मौके पर कुंडे मनाने के लिए उनके घर आया करती थीं। इस बार भी उनको आना था, मगर मंगलवार शाम उनकी मौत की खबर से वह सभी लोग सदमे में हैं।
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