दो विधानसभा क्षेत्र की 78 पंचायतों के हजारों लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने वाले घुमारवीं अस्पताल में अव्यवस्था का आलम है। हालत ऐसी है कि अस्पताल में सालों से अल्ट्रासाउंड मशीन खराब पड़ी है। इस कारण लोगों को महंगे दाम पर निजी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड करवाने पड़ रहे है। वहीं गर्भवती महिलाओं को निशुल्क उपचार की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
यही नहीं घुमारवीं अस्पताल में खून की जांच करने वाली मशीन भी खराब है। यह मशीन ऑटोमेटिक तरीके से खून की जांच करती थी। इसके खराब होने से भी लोगों को परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा है।
लोगों ने प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मशीन ठीक करने की कई बार मांग की। मगर लोगों की बात को सुनने के लिए कोई तैयार नहीं है। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन और निजी संस्थानों में कमीशन का खेल तो नहीं इस पर भी सवाल उठने लगे हैं।
आखिर ऐसा क्या है कि सालों से खराब चल रही मशीन को आज तक ठीक नहीं किया जा रहा है? हालांकि कुछ समय के लिए विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था कर एक निजी संस्थान के साथ टेंडर कर किया था। मगर 6 माह से वह टेंडर भी नहीं हो पाया है। इस कारण लोगों को भारी परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा हैं।
गर्भवती महिलाओं को मिलती है निशुल्क सुविधा
सरकारी अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिलती है। मगर मशीन खराब होने से गर्भवती महिलाओं को बाजार में अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए 500 से 600 अदा करने पड़ रहे है। जबकि डोपलर करवाने के 2500 तक वसूले जा रहे हैं।
अव्यवस्था ने ले ली थी युवक की जान
घुमारवीं अस्पताल में ऑॅक्सीजन न मिलने के कारण एक युवक की जान जा चुकी है। हादसा उस वक्त हुआ था जब अनिकेत को गंभीर हालत में घुमारवीं अस्पताल लाया था। मगर समय पर ऑक्सीजन की व्यवस्था न होने के कारण उसकी मौत हो गई थी। आनन फानन में उसे बिलासपुर रेफर किया गया था। मगर अस्पताल में एंबुलेंस की भी व्यवस्था नहीं थी। बीएमओ डॉ.कमल किशोर शर्मा कि कहा कि विभाग जल्द ही टेंडर करवाएगा। इससे लोगों को सरकारी दरों पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिल पाएगी।