जोनल अस्पताल बिलासपुर से दो चिकित्सकों ने त्यागपत्र दे दिया है। हालांकि डॉक्टर के इस्तीफा देने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। मगर पहले से ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे अस्पताल में इससे स्थिति और गंभीर हो गई है।
हालत यह है कि जोनल अस्पताल होने के बावजूद यहां लोगों को पीएचसी की सुविधाएं भी नहीं मिल रही है। जिला के सबसे बड़े अस्पताल में मात्र मरीजों को रेफर करके इतिश्री की जा रही है।गौर रहे है कि पहले ही अस्पताल में मात्र 12 डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे थे। वहीं अब दो चिकित्सकों के त्यागपत्र देने से डॉक्टरों की संख्या अब महज दस ही रह गई है। हालत यह है कि अस्पताल में डॉक्टरों के साथ-साथ ओटीए के भी पद खाली चल रहे हैं। इससे अस्पताल में किसी भी मरीज के ऑपरेशन नहीं हो रहे हैं।
बुधवार को जिला में हुए एक हादसे के बाद महिला को उपचार के लिए जोनल अस्पताल बिलासपुर लाया गया। जहां चिकित्सक न होने के कारण महिला को आईजीएमसी शिमला रेफर करना पड़ा। ऐसे में बड़ा सवाल है कि अगर बिना उपचार के रेफर किए गए मरीज को कुछ हो जाता है तो इसका जिम्मेवार कौन होगा। उल्लेखनीय है कि उक्त जिला से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा भी संबंध रखते हैं। मगर आज तक वह भी अपने जिला के लिए कुछ खास नहीं कर पाए।
हालांकि यहां के लोगों ने कई बार उनके पास बदतर स्वास्थ्य सेवाओं का दुखड़ा रोया। सूत्रों की मानें तो त्यागपत्र देने वाले डॉक्टरों को सरकार ने किन्हीं कारणों से नोटिस जारी किया था। माना जा रहा है कि त्यागपत्र देने के पीछे यह भी एक वजह हो सकती है। सदर के विधायक बंबर ठाकुर ने बताया कि डॉक्टरों ने त्यागपत्र दिया हैं। उन्होंने जनता को आश्वासन दिया कि एक सप्ताह के भीतर डॉक्टर जोनल अस्पताल बिलासपुर में आ जाएंगे।
जिला अस्पताल की हालत ऐसी है कि यहां तैनात सीएमओ, एमओएच और एमएस तो फोन उठाना भी जरूरी नहीं समझते हैं। जबकि सरकार ने साफ आदेश है कि सरकारी अधिकारियों को हर हाल में कॉल पिक करनी होगी।
जिला अस्पताल में ओटीए के चारों पद रिक्त चल रहे है। इस वजह से अस्पताल में किसी भी प्रकार के ऑपरेशन नहीं रहे हैं। इस कारण मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा हैं।