जेपी कंपनी में सीमेंट ढुलाई कार्य में लगे सैकड़ों ट्रक ऑपरेटर कंपनी की मनमानी के कारण दिलवालियेपन की कगार पर पहुंच गए हैं। हालत यह है कि जेपी कंपनी ट्रक ऑपरेटरों का करोड़ों का भाड़ा दबाकर बैठी हैं तो वहीं ऑपरेटर किराया न मिलने से ट्रकों की किस्तें जमा करवाने में असमर्थ है।
ऐसे में फाइनांस कंपनियां 510 ट्रकों को उठाकर ले गई है। जबकि करीब 200 ऑपरेटरों पर आईपीसी की धारा 138 के तहत चेक बाउंस के मामले कोर्ट में चल रहे हैं। हैरानी इस बात की है कि कंपनी प्रशासन और जन प्रतिनिधियों के आग्रह को भी पूरी तरह से नजरअंदाज कर रही है।
वहीं क्षेत्र में चल रहे पेट्रोल पंप, मैकेनिक और अन्य कारोबारी जिन्होंने ऑपरेटरों को उधार दिया था, वह भी बंद होने स्रद्ध कगार पर पहुंच गए हैं। मगर इसके बाद भी जेपी कंपनी ऑपरेटरों का बकाया भाड़ा देने के लिए तैयार नहीं है। यह सिलसिला पिछले दो सालों से लगातार चल रहा हैं।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में तत्कालीन उपायुक्त मानसी सहाय के हस्तक्षेप के बाद कंपनी ने चार किस्तों में 24 करोड़ अदा किए थे। मगर इसके बाद फिर से वहीं हाल हो गए हैं। अब कंपनी के पास ऑपरेटरों का 35 करोड़ रुपये फंस गया है।
वर्तमान में जेपी के पास बिलासपुर और सोलन जिला के करीब 3500 ट्रक ढुलाई का काम कर रहे हैं। मगर कंपनी की मनमानी के कारण ऑपरेटरों को दो वक्त की रोटी तक लाले पड़ चुके हैं। जमीन बैंक के पास गिरवी है, जो कभी भी कुर्क हो सकती है। प्रभावित ऑपरेटरों ने इस बारे में प्रदेश उच्च न्यायालय में कंपनी के खिलाफ केस किया था।
इस पर फैसला देते हुए हाईकोर्ट ने एग्रीमेंट के अनुसार कंपनी को हर सप्ताह पेमेंट करने के आदेश जारी किए थे। इसके साथ ही पुरानी बाकाया राशि को पूरा अदा करने के आदेश दिए थे। खारसी सभा के महासचिव दौलत सिंह ठाकुर का कहना है कि जेपी कंपनी न कोर्ट के आदेश और न ही सरकार के आदेश मानने को तैयार है। ऑपरेटरों को भी एग्रीमेंट के अनुसार पेमेंट नहीं मिल रही है।
इस कारण सैकड़ों ऑपरेटर बेघर होने की कगार पर पहुंच गए हैं। जेपी कंपनी के एचआर हैड का कहना है कि ऑपरेटरों को भाड़ा दिया जा रहा है। हाल ही में भी चार करोड़ की किस्त जारी की गई है। उन्होंने कहा कि जो भी पैसा देना है कंपनी उसे अदा करेगी। अभी सीमेंट की डिमांड भी कम है। उन्होंने साफ किया कि किसी भी ऑपरेटर का पैसा बकाया नहीं रहेगा।
ट्रक की खरीद के लिए ऑपरेटरों ने बैंक के पास जमीन तक रहन रखी है। मगर अब ऋण अदा न होने के कारण फाइनांस कंपनियों ने जमीन तक नीलाम करने के लिए नोटिस जारी करना शुरू कर दिए हैं।