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Bilaspur News: 518 ग्राम चिट्टा मामले में महिला आरोपी को नहीं मिली राहत

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अदालत से
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घुमारवीं कोर्ट ने मामले की सुनवाई कर जमानत अर्जी खारिज की
कमर्शियल मात्रा और पुराने मामले को देखते हुए अदालत ने नहीं दी जमानत
बलोह टोल प्लाजा के पास नाके के दौरान कार से बरामद हुआ था 518.4 ग्राम चिट्टा
-सह आरोपियों से पूछताछ में कुल्लू की महिला का नाम सामने आने के बाद हुई थी गिरफ्तारी

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। चिट्टा (हेरोइन) तस्करी के एक बड़े मामले में विशेष न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने महिला आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में बरामद मादक पदार्थ की मात्रा कॉमर्शियल श्रेणी में आती है और आरोपी की प्रथम दृष्टया संलिप्तता भी सामने आई है। ऐसे में एनडीपीएस एक्ट के तहत जमानत देने की शर्तें पूरी नहीं होती, इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती।
यह आदेश विशेष न्यायाधीश घुमारवीं डॉ. मोहित बंसल की अदालत ने आरोपी महिला की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनाया। आरोपी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 483 के तहत जमानत की मांग की थी। अभियोजन के अनुसार 29 सितंबर 2025 को पुलिस थाना घुमारवीं की टीम गश्त पर थी। पुलिस टीम सुबह करीब 4:30 बजे बलोह टोल प्लाजा से लगभग 80 मीटर आगे नाका लगाकर वाहनों की जांच कर रही थी। करीब 5:30 बजे एक कार को जांच के लिए रोका गया। कार में चालक के अलावा पीछे की सीट पर दो युवक बैठे हुए थे। चालक ने पुलिस को बताया कि दोनों युवकों ने अमृतसर से भुंतर जाने के लिए ऑनलाइन ऐप के माध्यम से उसकी टैक्सी 8 हजार रुपये में बुक की थी। जांच के दौरान पुलिस ने देखा कि पीछे बैठे युवक अपने पास रखे बैग को छिपाने का प्रयास कर रहे थे। इस पर पुलिस को संदेह हुआ और उन्होंने मौके पर एक मोटरसाइकिल सवार को गवाह के रूप में शामिल कर बैग की तलाशी ली। तलाशी के दौरान बैग से कपड़े बरामद हुए, जिनमें एक टी-शर्ट और काली जींस शामिल थी। जींस की जेब से एक आधार कार्ड और खाकी टेप में लिपटे दो पैकेट बरामद हुए।
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जब पैकेट खोले गए तो उनमें सफेद रंग का पाउडर मिला, जो अनुभव के आधार पर हेरोइन (चिट्टा) पाया गया। मौके पर जब इसकी तौल की गई तो इसकी मात्रा 518.4 ग्राम निकली। इसके बाद थाना घुमारवीं में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।
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मामले की आगे की जांच के दौरान सह आरोपी से पूछताछ की गई। उसने पुलिस को बताया कि उसने 23 सितंबर 2025 को एक बैंक खाते में 1,42,500 रुपये और 28 सितंबर 2025 को दूसरे खाते में 1,00,500 रुपये जमा करवाए थे। जांच में यह भी सामने आया कि सह आरोपी अमृतसर का रहने वाला है और वह कुल्लू में आरोपी महिला के घर में रहता था। पुलिस को यह भी पता चला कि सभी आरोपियों के बीच कई बार फोन पर बातचीत हुई थी। इन तथ्यों के आधार पर पुलिस ने गिरिजा शर्मा को जांच में शामिल किया और बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान ग्राम पंचायत मशगान की तत्कालीन प्रधान के बयान भी दर्ज किए गए। उन्होंने पुलिस को बताया कि आरोपी महिला और सह आरोपी क्षेत्र में चिट्टा बेचने का काम करते थे। इसके अलावा पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार महिला के खिलाफ थाना भुंतर में एनडीपीएस एक्ट के तहत एक अन्य मामला भी दर्ज है, जो अभी न्यायालय में लंबित है। जमानत याचिका में आरोपी पक्ष ने अदालत को बताया कि गिरिजा शर्मा लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही है। आरोपी पक्ष का कहना था कि उसे उचित इलाज, आराम और स्वच्छ वातावरण की आवश्यकता है, जो जेल में संभव नहीं है। इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में बरामद चिट्टा की मात्रा कॉमर्शियल श्रेणी में आती है। ऐसे मामलों में एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के तहत जमानत देने के लिए कड़ी शर्तें लागू होती हैं। अदालत ने पाया कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया संलिप्तता के संकेत मौजूद हैं। साथ ही उसके खिलाफ पहले से भी एनडीपीएस एक्ट का एक अन्य मामला दर्ज है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि वह जमानत पर रिहा होने के बाद किसी अपराध में शामिल नहीं होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी के स्वास्थ्य का ध्यान जेल प्रशासन नियमों के अनुसार रख सकता है और आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई जा सकती है।
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