-बड़गांव पंचायत में महाशिवपुराण कथा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। झंडूता की ग्राम पंचायत बड़गांव में चल रही शिव महापुराण कथा के चौथे दिन पंडित गोपाल स्वरूप शास्त्री ने लोगों को माता सती की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि जब दक्ष प्रजापति ने अपनी पुत्री सती का अपमान किया और भगवान शिव के प्रति तिरस्कार भाव प्रकट किया तो सती दुखी हुईं।
उन्होंने बताया कि योगमाया से सती ने अपने देह का त्याग किया। सती के देह त्याग के बाद यज्ञ स्थल पर खलबली मच गई। जब यह खबर भगवान भोलेनाथ को मिली तो वह दुखी हुए और क्रोध में आकर वीरभद्र को प्रकट किया। वीरभद्र ने दक्ष प्रजापति का सिर काटकर यज्ञ का विध्वंस किया। उन्होंने बताया कि उपस्थित देव गणों ने भगवान शिव से यज्ञ पूर्ण करने के लिए दक्ष प्रजापति को पुनर्जीवित करने का अनुरोध किया। इस पर भगवान भोलेनाथ ने उन्हें बकरे का सिर लगाकर जीवित किया। इसके बाद यज्ञ पूर्ण हुआ। उन्होंने बताया कि सही मायने में बकरा हमेशा मैं करता है इसलिए उसे अहंकार का प्रतीक बताया गया है। दक्ष प्रजापति भी अहंकार के वशीभूत हो गए थे। इसके कारण उसे बकरे का सिर लगाकर उनके अहंकार को दूर किया गया। इसके बाद दक्ष प्रजापति भगवान शिव का गुणगान करने लगे। वहीं, सती के वियोग में व्याकुल होकर भगवान शिव उनके शरीर को लेकर इधर-उधर भटकने लगे। इस पर भगवान विष्णु ने सती के अंगों को 108 भागों में विभक्त किया। जहां जहां सती के अंग गिरे वह शक्तिपीठ कहलाए। आज भी हमारे देश में 51 शक्तिपीठ विद्यमान है। जहां माता का वास है। जहां-जहां पर माता के अंग गिरे हैं वह शक्ति पीठ के रूप में पूजे जा रहे हैं। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। कथा के अंतिम दिन यानी 30 जुलाई को भंडारे का आयोजन किया जाएगा।