- खिल्ल गांव में श्रीमद्भागवत कथा का समापन
भागवत में लोगों को बताई जीवन जीने की कला
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। विकास खंड झंडूता की ग्राम पंचायत बड़गांव के खिल्ल गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का सोमवार को समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन कथा व्यास पंडित देवानंद शर्मा ने कथा का सारांश बताकर जीवन जीने की कला भी समझाई। उन्होंने कई उपदेशात्मक वृतांत सुनाकर भक्तों को निहाल भी किया।
कथा वाचक ने सूर्यदेव से सत्रजीत को उपहार स्वरूप मिली मणि का प्रसंग सुनाते हुए मणि के खो जाने पर जामवंत और श्रीकृष्ण के बीच 28 दिन तक चले युद्ध और फिर जामवंती, सत्यभामा समेत से श्रीकृष्ण के आठ विवाह की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि कैसे प्रभु ने दुष्ट भौमासुर के पास बंदी बनी हुई 16 हजार 100 कन्याओं को मुक्त करवाया और उन्हें अपनी पटरानी बनाकर उन्हें मुक्ति दी। उन्होंने सुदामा चरित्र को विस्तार से सुनाया। कृष्ण और सुदामा की निश्छल मित्रता का वर्णन करते हुए बताया कि कैसे बिना याचना के कृष्ण ने गरीब सुदामा का उद्धार किया। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण ने मित्रता निभाते हुए सुदामा की स्थिति को सुधारा। गोवध का विरोध और गोसेवा करने पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का सात दिनों तक श्रवण करने से जीव का उद्धार हो जाता है तो वहीं इसे कराने वाले भी पुण्य के भागी होते है। उन्होंने बताया कि प्रसन्नता पाने के लिए सत्संग अवश्य करना चाहिए। जीवन में रोना-धोना, सुख-दुख तो आते जाते रहते हैं, लेकिन यह जान लेना चाहिए कि मैं एक विशाल मन का एक छोटा-सा अंग हूं। कथा समापन पर हवन-यज्ञ और भंडारे का प्रसाद वितरित किया गया।