सुबह शुरू हुई प्रक्रिया, दोपहर बाद आया पहला परिणाम
सुबह से शाम तक नतीजों के इंतजार में डटे रहे प्रत्याशी और समर्थक
7:30 बजे बुला लिए पोलिंग एजेंट, 10 बजे शुरू हुई मतगणना
किसान भवन में परिणाम घोषित होने के इंतजार में अव्यवस्थाओं से जूझते रहे लोग
न छाया की व्यवस्था, न ही पीने के लिए पानी, न ही शौचालय की पर्याप्त सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में पंचायत समिति और जिला परिषद चुनाव की मतगणना रविवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हुई। इस दौरान पूरे दिन मतगणना की धीमी रफ्तार से लोगों में रोष रहा। सुबह से ही उम्मीदवार, समर्थक और पोलिंग एजेंट मतगणना केंद्रों पर पहुंच गए थे। प्रशासन की ओर से मतगणना सुबह 9 बजे शुरू किए जाने की जानकारी दी गई थी, लेकिन पोलिंग एजेंटों को सुबह करीब 7:30 बजे ही केंद्रों पर बुला लिया था।
पहचान पत्रों की जांच, प्रवेश प्रक्रिया और अन्य जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने में काफी समय लग गया। इसके बाद करीब 10 बजे मतगणना शुरू हो सकी। सदर विकास खंड में 25 बीडीसी और चार जिला परिषद वार्डों की मतगणना की जा रही थी। दोपहर 1:45 बजे सदर उपमंडल के वार्ड नंबर-7 का पहला परिणाम घोषित हुआ। पहला परिणाम आने तक उम्मीदवार और समर्थक लगातार अंदर से आने वाली सूचनाओं पर नजर बनाए थे। कई प्रत्याशी मतगणना केंद्र के बाहर घंटों खड़े रहे। परिणाम की धीमी गति के कारण उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा। जैसे-जैसे समय बीतता गया, मतगणना की रफ्तार को लेकर चर्चाएं भी तेज होती गईं।
शाम 5 बजे तक स्थिति यह रही कि सदर विकास खंड के 25 बीडीसी वार्डों में से 10 वार्डों के परिणाम भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाए थे। इससे उम्मीदवारों और उनके समर्थकों में बेचैनी बढ़ती दिखाई दी। कई प्रत्याशियों का कहना था कि परिणाम आने में सामान्य से अधिक समय लग रहा है, जिससे उन्हें पूरे दिन केंद्रों पर ही डटे रहना पड़ा। मतगणना केंद्र किसान भवन बिलासपुर में व्यवस्थाओं को लेकर भी लोगों में नाराजगी देखने को मिली। सुबह से शाम तक बड़ी संख्या में उम्मीदवार, समर्थक और उनके परिवारजन परिसर में मौजूद रहे, लेकिन उनके लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं।
केंद्र के खुले आंगन में न तो धूप से बचाव के लिए तिरपाल लगाए गए थे और न ही बैठने के लिए दरियों या कुर्सियों की कोई समुचित व्यवस्था थी। तेज धूप और गर्मी के बीच लोग घंटों खड़े रहकर परिणामों का इंतजार करते रहे। इतना ही नहीं, पीने के पानी और शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
कई समर्थकों ने बताया कि सुबह से केंद्र पर मौजूद रहने के बावजूद उन्हें मूलभूत सुविधाओं के लिए भटकना पड़ा। दिनभर इंतजार कर रहे लोगों में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी भी सुनने को मिली। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था के मोर्चे पर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। सभी मतगणना केंद्रों पर पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की पर्याप्त तैनाती की थी। केंद्रों में प्रवेश केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही दिया गया। पूरी प्रक्रिया की निगरानी सीसीटीवी कैमरों और वेबकास्टिंग के माध्यम से की जाती रही।
जिला नियंत्रण कक्ष से भी चारों केंद्रों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई ताकि मतगणना निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न हो सके। देर शाम तक भी कई वार्डों के परिणाम घोषित होने बाकी थे और उम्मीदवारों की नजरें अंतिम नतीजों पर टिकी हुई थीं। मतगणना की सुस्त रफ्तार और केंद्रों पर मूलभूत सुविधाओं की कमी पूरे दिन चर्चा का प्रमुख विषय बनी रही।
जिले में बीडीसी के 97 और जिला परिषद के 14 वार्डों के लिए मतगणना चार केंद्रों पर की गई। बिलासपुर सदर विकास खंड की मतगणना किसान भवन बिलासपुर, घुमारवीं विकास खंड की राजकीय महाविद्यालय घुमारवीं, झंडूता विकास खंड की राजकीय महाविद्यालय झंडूता, श्री नयना देवी जी विकास खंड की मतगणना स्वारघाट स्थित नए बीडीओ कार्यालय परिसर में की गई। चारों केंद्रों पर सुबह से ही प्रत्याशियों और समर्थकों की भारी भीड़ देखने को मिली। मतगणना शुरू होने के बाद उम्मीदवारों को शुरुआती परिणामों का बेसब्री से इंतजार रहा, लेकिन नतीजे आने की गति बेहद धीमी रही।
किसान भवन बिलासपुर के बाहर जिला परिषद , बीडीसी सदस्याें के परिणाम को सुनने के लिए आए लोग सुबह