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Bilaspur News: झंडूता मेला ग्राउंड के पीछे खंडहर इमारत नशेड़ियों का अड्डा

Mon, 09 Feb 2026 11:30 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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झंडूता मेला ग्राउंड के पीछे खंडहर बनी इमारत। संवाद
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जर्जर हालत में इमारत, कभी भी ढह सकती है,मेले से पहले बढ़ी चिंता
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समाज सेवियों, व्यापार मंडल ने उपायुक्त से की भवन गिराने की मांग

संवाद न्यूज एजेंसी

गेहड़वीं (बिलासपुर)। झंडूता बस स्टैंड के पीछे मेला ग्राउंड से सटी कई वर्ष से खाली पड़ी एक जर्जर सरकारी इमारत अब नशेड़ियों का अड्डा बन गई है। यहां दिन निकलते ही और देर रात तक नशे के आदी लोग चोरी-छिपे नशीले पदार्थों का सेवन करते देखे जा सकते हैं।

इस अवैध गतिविधि में बड़ी संख्या में युवा शामिल हैं, जो न केवल खुद को बर्बादी की ओर धकेल रहे हैं बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए भी खतरा बनते जा रहे हैं। स्थानीय निवासियों और दुकानदारों का कहना है कि इस खंडहरनुमा इमारत के भीतर और आसपास जगह-जगह नशे के इंजेक्शन, सिरिंज और अन्य नशीली सामग्री पड़ी रहती है। हालत यह है कि इस भवन का शायद ही कोई कमरा बचा हो, जहां नशीले पदार्थों के इस्तेमाल के निशान न हों। मेला ग्राउंड के आसपास कारोबार करने वाले दुकानदारों में भय का माहौल है, क्योंकि नशेड़ियों की आवाजाही से आये दिन विवाद और अप्रिय घटनाओं की आशंका बनी रहती है। यह भवन पूरी तरह से जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन के कुछ हिस्से पहले ही गिर चुके हैं, जबकि बाकी कभी भी ढह सकते हैं। ऐसे में यह इमारत किसी भी समय बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। चिंता की बात यह है कि आने वाले दो महीनों में यहां पर प्रसिद्ध बैसाखी नलवाड़ मेला लगता है। हर वर्ष इस मेले में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, बाहर से आने वाले कलाकार और पर्यटक शामिल होते हैं। मेला ग्राउंड से सटी इस खंडहर इमारत के चलते लोगों में डर बना हुआ है कि मेले के दौरान यदि कोई हिस्सा गिर गया तो जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि कोई अनहोनी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
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व्यापार मंडल झंडूता के प्रधान प्रशांत सहित सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से इस मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस भवन को गिराया या सुरक्षित नहीं किया गया, तो यह युवा पीढ़ी को नशे की दलदल में धकेलने के साथ-साथ किसी बड़े हादसे का कारण भी बन सकता है। पूर्व जिला परिषद सदस्य प्रोमिला वसु ने बताया कि यह भवन पहले पशुपालन विभाग के अधिकारियों का आवास हुआ करता था, लेकिन अब पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुका है। उन्होंने बताया कि पहले भी विभागीय टीम ने मौके का निरीक्षण कर इस भवन को असुरक्षित घोषित किया था। उस दौरान अधिकारियों ने यह कहकर भवन को नहीं गिराया कि नियमों के अनुसार 50 वर्ष तक इसे गिराया नहीं जा सकता। वसु ने सवाल उठाते हुए कहा कि 50 वर्ष की शर्त तभी लागू होती है, जब भवन सुरक्षित हो। जबकि मौजूदा हालत में इमारत की दीवारें टूट चुकी हैं, आधा हिस्सा गिर चुका है और छत पर पेड़ उग आए हैं। मेले के समय हमेशा डर बना रहता है कि कहीं भवन से गिरने वाले पत्थर कलाकारों, दर्शकों या बाहर से आए लोगों को नुकसान न पहुंचा दें। लोगों और समाजसेवियों ने झंडूता प्रशासन और उपायुक्त बिलासपुर से अपील की है कि बैसाखी नलवाड़ी मेले से पहले इस खंडहर इमारत को गिराया जाए या पूरी तरह सुरक्षित किया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
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