अधूरी रैंप और कई जगह रेलिंग गायब, मेले की भीड़ में मरीज-दिव्यांग श्रद्धालुओं की बढ़ी मुश्किलें
सफाई के दावों की भी खुली पोल, रास्तों, चौक चौराहों पर लगे गंदगी के अंबार
तरूणेश शर्मा
श्री नयना देवी (बिलासपुर)। प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नयना देवी में माता के दरबार तक पहुंचना सामान्य श्रद्धालुओं के लिए आस्था की यात्रा है, लेकिन बुजुर्ग, दिव्यांग और मरीजों के लिए यही यात्रा कई जगह मुश्किल बन जाती है। सोमवार को मंदिर में 85 हजार श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए।श्रावण अष्टमी मेले के दौरान इसकी जमीनी तस्वीर सामने आई। गुफा से कपाली कुंड तक रैंप बनाई गई है, लेकिन इसके आगे फिर चढ़ाई शुरू हो जाती है। ऐसे में मन्नत पूरी करने या बीमार परिजनों को दर्शन कराने आए श्रद्धालुओं को पालकी का सहारा लेना पड़ रहा है। रैंप पर भी कई जगह रेलिंग नहीं होने से सुविधा के साथ सुरक्षा का सवाल भी जुड़ गया है। कई परिवार बुजुर्ग माता-पिता, दिव्यांग परिजनों या बीमारी से जूझ रहे लोगों को मन्नत पूरी होने पर माता के दर्शन कराने लाते हैं, लेकिन मंदिर तक पहुंचने के रास्ते में चढ़ाई और भीड़ इन श्रद्धालुओं के लिए बड़ी बाधा बन जाती है। मेले में ऐसे कई बुजुर्ग पालकी में जाते दिखाई दिए। व्हीलचेयर पर आने वाले दिव्यांग या चलने में असमर्थ मरीजों के लिए भी पूरे मार्ग को सुविधाजनक बनाना जरूरी है। आस्था से जुड़े ऐसे श्रद्धालुओं के लिए रैंप की सुविधा केवल सुविधा नहीं, बल्कि मंदिर तक सम्मानजनक और सुरक्षित पहुंच का माध्यम है। पिछले दो दिनों में गुफा से बाबा कुटिया तक का रास्ता श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। कई जगह पैर रखने तक की जगह नहीं थी। सामान्य दिनों में अपेक्षाकृत खाली रहने वाला यह रास्ता वीआईपी आवाजाही के लिए भी इस्तेमाल होता है, लेकिन मेले के दौरान पैदल श्रद्धालुओं की संख्या इतनी बढ़ गई कि इधर से उधर निकलना भी मुश्किल रहा। ऐसे में कमजोर, बीमार या पालकी में जा रहे श्रद्धालुओं को भीड़ के बीच निकालना परिवार और पालकी संचालकों के लिए चुनौती बना रहा। गुफा से कपाली कुंड तक बनी रैंप राहत देती है, लेकिन इसमें जगह-जगह रेलिंग का अभाव है। जिस रास्ते का सबसे ज्यादा फायदा बुजुर्ग, दिव्यांग और मरीजों को मिलना चाहिए, वहीं सहारे की कमी चिंता बढ़ाती है। बारिश या फिसलन के दौरान खतरा और बढ़ सकता है। रैंप को केवल बना देने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि पूरी दूरी तक सुरक्षित रेलिंग, पर्याप्त चौड़ाई और आगे के मार्ग से सहज जुड़ाव सुनिश्चित किया जाए। श्रावण अष्टमी मेले में सफाई व्यवस्था के दावे भी जमीनी स्थिति के सामने कमजोर नजर आए। मुख्य सड़कों, चौक-चौराहों और पैदल रास्तों पर जगह-जगह गंदगी के ढेर दिखाई दिए। श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच कूड़ा समय पर न उठने से कई स्थानों पर अस्वच्छता बनी रही। बड़े मेले में हजारों लोगों की आवाजाही के बीच सफाई व्यवस्था को लगातार सक्रिय रखना जरूरी है, ताकि धार्मिक स्थल की स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुविधा दोनों बनी रहें।
कपाली कुंड के पास नगर परिषद की दुकानों के पीछे की भूमि भूस्खलन की चपेट में है। यह स्थान भीड़ वाले क्षेत्र के नजदीक होने के कारण चिंता का विषय है। मेले में भीड़ बढ़ने के साथ यातायात को अलग-अलग स्तर पर नियंत्रित करने और आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता खुला रखने की जरूरत है। बताते चलें कि श्री नयना देवी आने वाला हर श्रद्धालु एक जैसी शारीरिक क्षमता वाला नहीं होता। किसी के साथ बुजुर्ग माता-पिता होते हैं, कोई दिव्यांग परिजन को मन्नत पूरी कराने लाता है तो कोई मरीज को दर्शन कराने पहुंचता है। इसलिए मंदिर तक पहुंचने की व्यवस्था में सबसे पहले ऐसे लोगों की जरूरत देखी जानी चाहिए। गुफा से कपाली कुंड तक बनी रैंप को आगे के मार्ग से जोड़कर पूरी तरह सुगम बनाया जाए और जहां-जहां रैंप है वहां सुरक्षित रेलिंग लगाई जाए। श्रावण अष्टमी मेले ने साफ कर दिया है कि श्री नयना देवी में सुविधाओं का आकलन केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि उस श्रद्धालु की नजर से होना चाहिए जो कमजोर शरीर के बावजूद मन्नत पूरी करने माता के दरबार तक पहुंचना चाहता है। संवाद
दो बड़े हादसों ने दिए थे सबक
श्री नयना देवी में भीड़ प्रबंधन की जरूरत को दो बड़े हादसों ने बेहद गंभीर बना दिया। वर्ष 1983 में मंदिर में भगदड़ के दौरान करीब 60 लोगों की मौत हुई थी। उस समय मंदिर आने-जाने के लिए एक ही रास्ता था और बीच में रस्सी लगाकर दोनों दिशाओं में श्रद्धालुओं की आवाजाही करवाई जाती थी। रास्ता टूटने के बाद भगदड़ मची और कई लोग नीचे गिरने के बाद उठ नहीं पाए। इसके बाद मंदिर के लिए अलग प्रवेश और निकास मार्ग बनाया गया। वर्ष 2008 में फिर दर्दनाक भगदड़ हुई, जिसमें करीब 150 लोगों की जान चली गई। उस समय रास्ते में लगे बैरिकेड के बीच श्रद्धालु फंस गए थे। भीड़ के दबाव में नीचे गिरने वाले कई लोग दोबारा उठ नहीं पाए। हादसे के बाद बैरिकेड्स हटाने समेत भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था में बदलाव किए गए। दोनों हादसे यही सबक देते हैं कि मंदिर में भीड़ बढ़ने पर रास्तों की चौड़ाई, प्रवेश-निकास और मौके पर लगातार निगरानी सबसे अहम है।
कोट
मेले के पूरे क्षेत्र को नौ सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक सेक्टर में बैरिकेडिंग की गई है और वहां एएसपी व डीएसपी रैंक के पुलिस अधिकारी तथा प्रशासनिक अधिकारी तैनात हैं। ऐसे में किसी भी तरह की अव्यवस्था की नौबत नहीं आएगी। बच्चों और श्रद्धालुओं को बैरिकेडिंग के भीतर व्यवस्थित तरीके से प्रवेश दिया जाएगा।
-धर्मपाल, एसडीएम, स्वारघाट
श्री नयना देवी जी में लगे कूड़े के ढेर। संवाद
श्री नयना देवी जी में लगे कूड़े के ढेर। संवाद
श्री नयना देवी जी में लगे कूड़े के ढेर। संवाद
श्री नयना देवी जी में लगे कूड़े के ढेर। संवाद