संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। डियारा सेक्टर में आयोजित रामलीला में कलाकारों ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। प्रभु श्रीराम और माता शबरी के मिलन के दृश्य में प्रेम, भक्ति और सामाजिक समानता का संदेश दिया गया। वहीं, पंचवटी में सीता हरण, जटायु-रावण युद्ध और राम-सुग्रीव मित्रता के प्रसंगों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
शबरी मिलन के दृश्य में प्रभु श्रीराम की भूमिका निभा रहे नवीन सोनी ने अपने संवादों के माध्यम से बताया कि सच्ची भक्ति में जातिगत भेदभाव और ऊंच-नीच के लिए कोई स्थान नहीं है। प्रेम और श्रद्धा ही भक्ति का आधार हैं। कलाकारों की संवाद अदायगी और अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। इस दौरान पंडाल तालियों से गूंज उठा।
इसके बाद पंचवटी में सीता हरण का मंचन किया गया। रावण की भूमिका निभा रहे गोपाल ने दमदार अभिनय से दर्शकों की सराहना बटोरी। माता सीता का हरण होने पर उन्हें बचाने के लिए जटायु रावण से युद्ध करता है। वृद्ध होने के बावजूद जटायु पूरी शक्ति से मुकाबला करता है, लेकिन अंत में घायल होकर प्राण त्याग देता है। इस प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
आगे के दृश्यों में माता सीता की तलाश करते हुए प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण पंपा सरोवर के समीप पहुंचते हैं, जहां उनकी भेंट हनुमान से होती है। हनुमान दोनों भाइयों को सुग्रीव से मिलवाते हैं। इस दौरान सुग्रीव प्रभु श्रीराम से बाली के विरुद्ध सहायता मांगते हैं और बदले में माता सीता की खोज के लिए अपनी वानर सेना का सहयोग देने का वचन देते हैं।
रामलीला के इन प्रसंगों के माध्यम से कलाकारों ने भक्ति, त्याग, मित्रता, निष्ठा और कर्तव्य के आदर्शों को जीवंत किया। दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय और मंचन की सराहना की।