प्राकृतिक तौर पर तैयार अनाज, फल और सब्जियां सेहत के लिए लाभदायक
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। प्रदेश के तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए प्रदेश की चार औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में कृषि आधारित पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। इनमें नादौन में कृषि, घुमारवीं और ठियोग में बागवानी तथा शाहपुर में पशुपालन पाठ्यक्रम शामिल हैं।
मंत्री शनिवार को जिले के कंदरौर में डेरीका फार्म के उद्घाटन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। धर्माणी ने संस्थान के प्रबंधकों को बधाई दी और कहा कि इस पहल से न केवल प्रबंधक स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनेंगे, बल्कि अन्य ग्रामीण और बेरोजगार युवाओं के लिए भी यह प्रेरणा का स्रोत साबित होगा। कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार ने सत्ता संभालते ही किसानों, बागवानों, मजदूरों और आमजन के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं।इस अवसर पर पूर्व विधायक तिलक राज शर्मा, जिला पार्षद गौरव शर्मा सहित बड़ी संख्या में गण्यमान्य लोग उपस्थित रहे।
कहा कि अब तक प्रदेश में कृषि और बागवानी की पढ़ाई केवल डिग्री स्तर तक सीमित थी, लेकिन वर्तमान समय की जरूरतों को देखते हुए आईटीआई स्तर पर भी उनकी पढ़ाई शुरू की गई है। इससे कृषि, बागवानी और पशुपालन से जुड़कर नई पीढ़ी आत्मनिर्भर और गौरवान्वित महसूस करेगी। कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार ने सत्ता संभालते ही किसानों, बागवानों, मजदूरों और आमजन के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं।
प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्राकृतिक तौर पर तैयार अनाज, फल और सब्जियां सेहत के लिए लाभदायक हैं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से भी बचाते हैं। उन्होंने चिंता जताई कि प्रदेश में कैंसर रोगियों की संख्या राष्ट्रीय औसत से अधिक है। मंत्री ने बताया कि सरकार ने प्राकृतिक तौर पर तैयार गेहूं का समर्थन मूल्य 60 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्की का 40 रुपये और कच्ची हल्दी का 90 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया है। उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य युवाओं और शिक्षित बेरोजगारों को कृषि आधारित अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
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डेरीका फार्म बनेगा प्रेरणा का स्रोत
धर्माणी ने डेरीका फार्म की स्थापना पर प्रबंधकों को बधाई दी और कहा कि इस पहल से न केवल प्रबंधक स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनेंगे, बल्कि अन्य ग्रामीण और बेरोजगार युवाओं के लिए भी यह प्रेरणा का स्रोत साबित होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि फार्म को प्रदर्शनी फार्म के रूप में विकसित किया जाए, ताकि क्षेत्र के किसान और छात्र व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर सकें। साथ ही उन्होंने फार्म में सोलर डिहायड्रेशन यूनिट स्थापित करने की सलाह दी और आश्वस्त किया कि सरकार की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
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फार्म से 20 को रोजगार, 100 किसान जुड़े
इससे पहले डेरीका फार्म की निदेशक सीरत तूर ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए बताया कि फार्म में डेयरी, दुग्ध प्रसंस्करण इकाई, रेस्तरां, मिठाई की दुकान, बेकरी और मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित की गई है। कहा कि यहां सीधे तौर पर 20 लोगों को रोजगार दिया गया है और अब तक लगभग 100 किसान फार्म से जुड़ चुके हैं। फार्म के प्रबंध निदेशक संजीव ठाकुर ने मुख्य अतिथि और अन्य गणमान्य लोगों का पारंपरिक स्वागत किया।