शिकायतों की प्रतियां, लोन अकाउंट लेटर और समझौता डीड शामिल, 29 सितंबर को होगी सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। प्रधान न्यायाधीश फैमिली कोर्ट बिलासपुर की अदालत ने एक मामले में आवेदकों की ओर से पेश किए गए शिकायतों की प्रतियां, ऋण खाते से संबंधित पत्र और समझौता दस्तावेज को रिकॉर्ड पर लेने की अनुमति दे दी है। अदालत ने आवेदकों को इन दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में पेश करने की भी अनुमति प्रदान की है। मामले की अगली सुनवाई अब 29 सितंबर 2026 को बहस के लिए होगी।
मामले में आवेदकों की ओर से विधिक सहायता अधिवक्ता ने बीएनएसएस की धारा 348/सीआरपीसी की धारा 311 के तहत आवेदन दायर किया था। आवेदन में कहा गया था कि कुछ दस्तावेज पहले चरण में रिकॉर्ड पर पेश नहीं हो पाए थे। इनमें शिकायतों की प्रतियां, लोन अकाउंट लेटर और समझौता डीड शामिल हैं। आवेदकों की ओर से तर्क दिया गया कि ये दस्तावेज मामले से सीधे तौर पर संबंधित और विवाद के निपटारे के लिए महत्वपूर्ण हैं। दस्तावेज पहले पेश न किया जाना जानबूझकर नहीं था। प्रतिवादी की ओर से पेश अधिवक्ता ने आवेदन स्वीकार किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि दस्तावेज मामले के निस्तारण के लिए प्रासंगिक हैं और इन्हें रिकॉर्ड पर लेने से प्रतिवादी को किसी प्रकार का नुकसान होने की संभावना नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि दस्तावेज विवाद को प्रभावी ढंग से तय करने में सहायता कर सकते हैं। अदालत की अनुमति के बाद आवेदकों की अधिवक्ता ने अलग बयान के माध्यम से चार दस्तावेज साक्ष्य में पेश किए। इनमें शिकायत की प्रति को एक्जिबिट पी-1, लोन अकाउंट लेटर की प्रति को एक्जिबिट पी-2, दूसरी शिकायत की प्रति को एक्जिबिट पी-3 तथा 15 नवंबर 2022 के समझौता डीड को एक्जिबिट पी-4 के रूप में रिकॉर्ड पर लिया गया। इसके साथ ही आवेदकों की ओर से साक्ष्य बंद कर दिया गया। अदालत ने आवेदन का निस्तारण करते हुए दस्तावेजों को मुख्य केस फाइल के साथ टैग करने के निर्देश दिए हैं। अब मामले में दोनों पक्षों की दलीलें 29 सितंबर को सुनी जाएंगी।