दिवंगत आईटीबीपी कर्मी के बैंक खाते को लेकर पत्नी और बच्चों में चल रहा है विवाद
अंतिम फैसला आने तक एसबीआई को किसी भी पक्ष को राशि जारी नहीं करने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश घुमारवीं डॉ. मोहित बंसल की अदालत ने दिवंगत आईटीबीपी कर्मी के संयुक्त बैंक खाते से राशि निकालने के मामले में उनकी दूसरी पत्नी की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश घुमारवीं द्वारा 24 दिसंबर 2024 को पारित उस अंतरिम आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें विवादित बैंक खाते की राशि को लेकर यथास्थिति बनाए रखने और भारतीय स्टेट बैंक की शाखा को किसी भी पक्ष को भुगतान न करने के निर्देश दिए गए थे।
मामले के अनुसार कर्मी के पहले विवाह से चार बच्चे हैं। पहली पत्नी के निधन के बाद उन्होंने वर्ष 2014 में दूसरा विवाह किया था। बच्चों का आरोप है कि विवाह के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया और अलगाव की स्थिति बन गई। बच्चों का दावा है कि पिता की मृत्यु के बाद दूसरी पत्नी पूरे बैंक बैलेंस पर अधिकार जताकर राशि निकालने का प्रयास कर रही थीं, जबकि वे सभी प्रथम श्रेणी के कानूनी वारिस होने के कारण बराबर के हिस्सेदार हैं।
दूसरी ओर, दूसरी पत्नी ने अदालत में दलील दी कि संबंधित बैंक खाता संयुक्त था और पति की मृत्यु के बाद बैंकिंग नियमों के अनुसार वह जीवित खाताधारक होने के कारण राशि प्राप्त करने की अधिकारी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उनके जवाब और बैंक के पक्ष को सही तरीके से नहीं माना। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एडीजे ने कहा कि फिलहाल यह तय नहीं हुआ है कि विवादित राशि पर अंतिम अधिकार किसका है। ऐसे में यदि किसी एक पक्ष को अभी पूरी राशि निकालने की अनुमति दे दी जाती है तो दूसरे पक्ष के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। अदालत ने माना कि मुख्य मुकदमे के निपटारे तक राशि सुरक्षित रखना आवश्यक है। इसी आधार पर अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट का आदेश बरकरार रखा गया।