दोषी करार के बाद सजा पूरी होने पर मिली रिहाई
एसीजेएम कोर्ट घुमारवीं में कई चरणों में चली सुनवाई
अदालत ने सोचने का समय देने के बाद स्वीकार किया आरोपी का इकबालिया बयान
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घर में घुसकर चोरी करने के मामले में आरोपी ने अदालत में स्वयं अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। हालांकि आरोपी पहले ही न्यायिक हिरासत में उतनी अवधि काट चुका था जितनी सजा अदालत द्वारा सुनाई गई, इसलिए अदालत ने उसे रिहा करने के आदेश भी जारी कर दिए। यह मामला एसीजेएम कोर्ट घुमारवीं में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में सुना गया, जहां पूरे दिन अलग-अलग चरणों में सुनवाई हुई।
मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी को पुलिस लाइन बिलासपुर के एचएचसी और महिला कांस्टेबल की अभिरक्षा में अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि यह केस जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिलासपुर के कार्यालय आदेश के तहत जेएमएफसी अदालत से स्थानांतरित होकर एसीजेएम अदालत में आया है। अदालत ने सबसे पहले कार्यालय से रिकॉर्ड की जांच करवाई और रिपोर्ट देखने के बाद मामले को विधिवत पंजीकृत करने के आदेश दिए। इसके बाद आरोपी अपने अधिवक्ता के साथ अदालत में पेश हुआ और अलग से दर्ज कराए गए बयान में कहा कि वह बिना किसी दबाव, डर या प्रलोभन के अपनी मर्जी से अपराध स्वीकार करना चाहता है। आरोपी ने अदालत से आवश्यक अनुमति देने का आग्रह किया। अदालत ने आरोपी के बयान को गंभीरता से लेते हुए उसे सोचने और अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए समय दिया। मामले की सुनवाई कुछ समय के लिए स्थगित कर दी। बाद में दोबारा सुनवाई शुरू होने पर आरोपी फिर अदालत में पेश हुआ और उसने दोहराया कि वह पूरी तरह स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार कर रहा है। आरोपी ने अदालत से कहा कि वह अदालत द्वारा दी जाने वाली सजा भुगतने और लगाया जाने वाला जुर्माना जमा करने के लिए तैयार है। अदालत ने माना कि आरोपी ने बिना किसी भय और दबाव के अपराध स्वीकार किया है। इसके बाद अदालत ने उसे घर में घुसकर चोरी करने और चोरी करने के आरोपों में दोषी करार देते हुए सजा के बिंदु पर सुनवाई दोपहर बाद के लिए निर्धारित कर दी।
दोपहर बाद हुई सुनवाई में अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच सजा को लेकर विस्तार से बहस हुई। राज्य पक्ष की ओर से अदालत से कहा गया कि आरोपी ने गंभीर अपराध किया है और उसने स्वयं अपराध स्वीकार किया है, इसलिए उसे पूर्ण और कठोर सजा दी जानी चाहिए। वहीं बचाव पक्ष ने अदालत से नरमी बरतने की मांग करते हुए कहा कि आरोपी पहली बार अपराध में शामिल पाया गया है, लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है तथा उसकी वृद्ध मां की देखभाल करने वाला कोई अन्य नहीं है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपने आदेश में कहा कि घर में घुसकर चोरी जैसे अपराध गंभीर प्रकृति के होते हैं और ऐसे मामलों में अत्यधिक नरमी उचित नहीं कही जा सकती। अदालत ने आरोपी को घर में घुसकर चोरी करने के आरोप में एक वर्ष छह माह के कारावास और 200 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में सात दिन का साधारण कारावास भुगतने के आदेश दिए गए। वहीं चोरी के आरोप में आरोपी को एक वर्ष छह माह 14 दिन के कारावास, 200 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना अदा न करने पर सात दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना तय किया गया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य भी रखा गया कि आरोपी पहले ही एक वर्ष छह माह 14 दिन की न्यायिक हिरासत में रह चुका है। अदालत ने इसे ध्यान में रखते हुए हिरासत में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित कर लिया। इसी आधार पर अदालत ने आदेश दिया कि यदि आरोपी किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तुरंत रिहा किया जाए। अदालत ने अपने अंतिम आदेश में यह भी कहा कि मामले से संबंधित जब्त संपत्ति, यदि कोई हो, तो अपील की अवधि समाप्त होने के बाद नियमानुसार निस्तारित की जाए। साथ ही सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद मामले की फाइल रिकॉर्ड रूम भेजने के निर्देश भी जारी किए गए।