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जिला में कोरोना काल में भी अपने काम के प्रति निष्ठा दिखाकर बने उदाहरण

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बिलासपुर। पांच सितंबर को पूरे भारत में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। शिक्षक दिवस हर साल भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के अवसर पर मनाया जाता है। वह एक महान शिक्षक थे। इसके साथ-साथ वह स्वतंत्र भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति भी थे। उन्हें साल 1954 में भारत रत्न से नवाजा गया था। उन्हीं के पद्चिह्नों पर चलते हुए जिला के कुछ शिक्षकों ने अपनी मेहनत और लगन से कोरोना काल में मिसाल कायम की है।
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बात करें जिला के अध्यापकों की तो इनमें प्राथमिक शिक्षा से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल तक के अध्यापकों ने अपने छात्रों को बेहतर शिक्षा देने के लिए अलग-अलग रूप से कड़ी मेहनत की। इनमें किसी ने घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाया तो किसी ने लॉकडाउन के दौरान छात्रों को घरों तक अपने खर्चे पर किताबें तो मुहैया करवाई। 12वीं कक्षा के छात्रों को सिलेबस के साथ नीट की परीक्षा की तैयारी भी करवाई। वहीं एक प्रधानाचार्य ने सेवानिवृत्ति के समय भी स्कूल के बच्चों को सुविधा मुहैया करवाने के लिए दिन-रात काम किया और सेवानिवृत्त होने से पहले अपना कार्य पूरा किया।
रावमापा पंजगाई में मिड-डे मील के लिए तैयार करवाया डाइनिंग हाल
रामवमापा पंजगाईं से 31 जुलाई को प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त होने वाले अश्विनी गुप्ता ने अन्य प्रधानाचार्यों के लिए मिसाल पेश की है। उन्होंने कोरोना काल में जबकि उनकी सेवानिवृत्ति के कुछ ही दिन शेष बचे थे, ऐसे में भी दिन रात मेहनत कर स्कूल के बच्चों के लिए डाइनिंग हाल तैयार करवाया। इसके लिए उन्होंने कोरोना काल में ही सारी औपचारिकताएं पूरी की और सेवानिवृत्ति के दिन इसे छात्रों के लिए समर्पित भी किया। इन अध्यापकों की अपने काम के प्रति निष्ठा ने इन्हें औरों से अलग कर दिया है। इतना ही नहीं उन्होंने सेवानिवृत्ति से पहले पिछले 40 वर्षों से लटका रावमापा की जमीन का सीमांकन कार्य भी पूरा करवाया।
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छात्रों को घर-घर पहुंचाई किताबें, करवा रहे ऑनलाइन नीट की तैयारी
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पंजगाई में जीव विज्ञान के प्रवक्ता राजेश कुमार ने लॉकडाउन में 11वीं और12वीं कक्षा के छात्रों को अपने पैसों से किताबें खरीद कर घर-घर पहुंचाई। उन्होंने बच्चों को अपने सिलेबस के साथ नीट परीक्षा की तैयारी भी करवाई। वहीं उन्होंने खुद अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों के विषय में जाना। अभिभावक फोन करें या न करें लेकिन वे बच्चों की रोजाना रिपोर्ट अभिभावकों तक जरूर पहुंचाते और बच्चों की खूबियों और खामियों पर भी चर्चा करते। जिसे अभिभावकों ने खूब सराहा।
घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ा रहे
राजकीय प्राथमिक पाठशाला मिहाड़ा में तैनात शिक्षक खूब सिंह ने लॉकडाउन में जिन बच्चों के पास मोबाइल नहीं थे, उन्हें घर-घर जाकर पढ़ाया। जिसके लिए उन्हें अपना काफी वक्त बच्चों को देना पड़ा। उन्होंने हार नहीं मानी और स्कूल के करीब 18 बच्चों को शिक्षित किया। जो कि अन्य अध्यापकों के लिए उदाहरण बना है।
प्री नर्सरी के बच्चों के लिए तैयार किया रूम
राजकीय प्राथमिक पाठशाला गांधी रोपा के अध्यापक अजय कुमार डोड ने भी लॉकडाउन के दौरान अपने व्यवसाय के प्रति ईमानदारी से काम किया। उन्होंने न केवल स्कूल के बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाया, बल्कि साथ में स्कूल के प्री नर्सरी रूम को भी तैयार करवाया। जब सभी लोग कोरोना के डर से घरों में सिमटे थे तब यह स्कूल में बच्चों को अच्छी सुविधा देने की तैयारी में जुटे थे।
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