बिलासपुर। बस किराया बढ़ाने के बाद भी जिला में 306 में से केवल 100 बसें ही अपने रूट पर चल रही हैं। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आवाजाही करने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। निजी बस ऑपरेटरों का कहना है कि कोरोना की वजह से सवारी नहीं मिल रही है। वहीं बसों के तेल खर्च के साथ अन्य खर्चों को निकालना मुश्किल हो गया है। जिसके चलते जिला में बसों के 50 से ज्यादा रूट बंद कर दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि जिला में कोरोना आने से पहले 306 निजी बसें रूट पर चलती थीं। कोरोना काल शुरू होने के बाद सभी ने अपनी बसें खड़ी कर दी थी। वहीं निजी बस ऑपरेटरों ने सरकार से किराया वृद्धि की मांग की। इनकी मांग पूरी होने के बाद जिला में करीब 150 बसें यानी 50 फीसदी बसें सड़कों पर उतारी लेकिन एक माह के बाद ही ऑपरेटरों ने हाथ खड़े कर दिए। ऑपरेटरों का कहना है कि स्कूल और कॉलेज बंद हैं। वहीं लोग घरों से बाहर जाने के लिए ज्यादातर निजी वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिसके कारण बसों को सवारी नहीं मिल रही है। इसी कारण निजी बस ऑपरेटर घाटे में जा रहे हैं। तेल के खर्च से लेकर बस स्टाफ के वेतन तक को जेब से भरना पड़ रहा है। यहीं कारण रहा कि ऑपरेटरों ने जिला में करीब 50 बसों के रूट बंद कर दिए। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आवाजाही के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं निजी बसों के साथ निगम की बसों को भी घाटे का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में जिला भर में करीब 55 रूटों पर निगम की बसें चल रही हैं। उनमें हर दिन परिवहन निगम को 1.5 लाख की आमदनी हो रही है। कोरोना काल से पहले इन्हीं रूट पर करीब 4.5 लाख हर दिन आमदनी होती थी।
निजी बसों के जिला में वर्तमान में 100 रूट ही चल रहे हैं। बसों को सवारी नहीं मिल रही है। जिसके कारण ऑपरेटरों को रूट बंद करने पड़े। जिला में कुल 306 निजी बसें हैं। लेकिन 206 बसें सवारी न होने के कारा खड़ी हैं।
विद्या देवी, आरटीओ बिलासपुर।
जिला के 55 रूट पर परिवहन निगम की बसें चल रही हैं। कोरोना काल से पहले इन रूट पर रोजाना की कमाई 4.5 लाख रुपये के करीब होती थी। वर्तमान में सवारी न होने से यह 1.5 लाख तक सिमट गई है। जिससे कि तेल का खर्च भी निगम को उठाना पड़ रहा है।
केएल यादव, आरएम बिलासपुर