शाहतलाई में भागवत कथा के समापन अवसर पर उपस्थित श्रद्धालु। स्रोत: जागरूक पाठक।
शाहतलाई में हवन यज्ञ, भंडारे के साथ भागवत कथा हुई संपन्न
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहतलाई (बिलासपुर)। शाहतलाई में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का समापन मंगलवार को हवन यज्ञ और भंडारे के साथ हुआ। आचार्य प्रमोद पुंज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का अंतिम दिन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। कथा के अंतिम श्लोक को सुनने से पूरे सात दिन की कथा का फल प्राप्त हो जाता है।
कथा के सभी मुख्य प्रसंगों जैसे सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष का सार सुनाते हुए बताया कि श्रोताओं को भक्ति, मित्रता और धर्म का संदेश प्राप्त होता है। हमें जीवन में धर्म और भक्ति को अपनाने का संकल्प ऐसे सत्संगों से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुदामा की सच्ची मित्रता, निस्वार्थ प्रेम भगवान की कृपा को दर्शाता है। सुदामा की दरिद्रता में भी भगवान कृष्ण के प्रति उनकी अटूट भक्ति ने उन्हें अंतत: मोक्ष और अपार संपत्ति का पात्र बनाया। आचार्य ने कहा कि राजा परीक्षित को शुकदेव मुनि से श्रीमद्भागवत कथा सुनकर मोक्ष की प्राप्ति हुई थी, जो यह दर्शाता है कि कलयुग में भी भाव पूर्ण कथा श्रवण से मनुष्य को मुक्ति मार्ग सुगम है। व्यास पीठ पुंज ने पूणाZहुति उपरांत धर्म के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि धर्म, त्याग और भक्ति ही जीवन के असली धन हैं, जो हर संघर्ष में मनुष्य का साथ देते हैं। श्रोतागण इस दिन धर्म पर चलने और भगवान की भक्ति में लीन रहने का संकल्प लें। कथा समापन पर भंडारे का भी आयोजन किया गया। साथ ही अगले साल 26 अक्टूबर से 1 नवंबर तक भागवत कथा का निर्धारित समय व्यास पीठ ने घोषित किया। आयोजकों ने श्रीमद्भागवत पुराण और आचार्य प्रमोद पुंज जी को कथा के समापन पर सुंदर भजनों से विदाई दी।