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Bilaspur News: मौसंबी के पौधे सूखे, ग्रामीण में नाराजगी, बागवानी मंत्री को सौंपा ज्ञापन

Sun, 04 Jan 2026 11:47 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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शिमला में बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी को ज्ञापन देने पहुंचे कोठी मझेड़ के ग्रामीण। स्रोत: ग्रा
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सिंचाई व्यवस्था और उच्च गुणवत्ता के पौधे लगाने की मांग
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बोले- पौधरोपण के लिए ली गई अतिरिक्त भूमि पर अभी तक नहीं लगाए पौधे

संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला (बिलासपुर)। जिला बिलासपुर के सदर खंड की दियोथ पंचायत के कोठी-मझेड़ गांव में बागवानी विभाग के महत्वाकांक्षी शिवा प्रोजेक्ट के तहत लगाए गए मौसंबी के पौधों के सूखने का मामला सामने आया है। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी से शिमला में शिकायत की और ज्ञापन सौंपा है।
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ग्रामीणों की अगुवाई कर रहे शालिग्राम ठाकुर ने बताया कि करीब चार वर्ष पहले एडीबी से वित्त पोषित शिवा प्रोजेक्ट के तहत कोठी और मझेड़ गांव की लगभग 200 बीघा भूमि पर मौसंबी के पौधे लगाए गए थे। इस परियोजना में दोनों गांवों के करीब 60 परिवार शामिल हैं। पौधों की सिंचाई के लिए कुहल (पानी की नहर) के माध्यम से व्यवस्था की गई थी, लेकिन कुहल के क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण अब खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। नतीजतन बड़ी संख्या में पौधे सूख चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिन पेड़ों पर फल लगे भी हैं, उनके विपणन (मार्केटिंग) की विभाग द्वारा कोई व्यवस्था नहीं की गई। इससे बागवानों को न तो उनकी उपज के उचित दाम मिल पा रहे हैं और न ही बाजार तक पहुंच मिल रही है। किसानों का आरोप है कि इस स्थिति में वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। शालिग्राम ठाकुर ने यह भी बताया कि इस क्लस्टर में करीब 100 बीघा अतिरिक्त भूमि मौसंबी के पौधरोपण के लिए ली गई थी, लेकिन चार साल बीत जाने के बावजूद वहां अब तक कोई पौधा नहीं लगाया गया। इस दौरान यह भूमि खाली पड़ी रही, जिससे किसानों को किसी भी प्रकार की आमदनी नहीं हुई। पहले किसान इसी जमीन पर अनाज और सब्जियां उगाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे, लेकिन अब यह सौदा घाटे का साबित हो रहा है। ग्रामीणों ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि क्लस्टर में गुणवत्ता वाले पौधे लगाए जाएं, सिंचाई की स्थायी व्यवस्था की जाए और उत्पादित फलों की उचित मार्केटिंग सुनिश्चित की जाए। यदि ऐसा संभव नहीं है तो प्रभावित किसानों को एक लाख रुपये प्रति बीघा के हिसाब से मुआवजा दिया जाए, ताकि वे अपनी भूमि को दोबारा कृषि योग्य बना सकें।
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