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ये रुके नहीं, थके नहीं और दुनिया को बताया दिव्यांगता आगे बढने से नहीं रोक सकती

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बिलासपुर। शुक्रवार को विश्व दिव्यांग दिवस मनाया गया। इस दिवस का उद्देश्य दिव्यांगता को सामाजिक कलंक मानने की धारणा से लोगों को दूर करने के साथ दिव्यांगों के अधिकारों की रक्षा करना है। असल जिंदगी के कुछ ऐसे हीरो भी हमारे बीच हैं जो दिव्यांग होने के बाद भी थके नहीं, हारे नहीं। उन्होंने ऐसे उदाहरण पेश किए जो सामान्य इंसान के लिए भी नामुमकिन सा है। दिव्यांग दिवस के मौके पर जानिए ऐसी ही शख्सियतों के बारे में जिन्होंने खुद को संभाला, लक्ष्य हासिल किया और दूसरों के लिए प्रेरणा बने।
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बिलासपुर की चेतना संस्था के 28 दिव्यांग बच्चों ने ऐसा ही उदाहरण पेश किया है। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और लग्न से साबित कर दिया कि अगर कुछ कर दिखाने का जज्बा हो तो दुनिया में सब कुछ मुमकिन है। बताते चलें कि डॉक्टर मल्लिका नड्डा ने 15 अगस्त 1998 को चेतना संस्था की शुरूआत की थी। जिसके बाद यह संस्था जिला के ही नहीं बल्कि प्रदेश भर के दिव्यागों के लिए उम्मीद की किरण बनी और वर्तमान में इस संस्था के दो विशेष स्कूलों में 250 बच्चे अपने जीवन को बेहतर तरीके से जीने के लिए बेहतर शिक्षा व अन्य गतिविधियां सीख रहे हैं। साल 2003 से साल 2019 तक इस संस्था के 28 बच्चों ने स्पेशल ओलंपिक में 28 पदक जीते हैं। जिनमें 9 स्वर्ण, 7 रजत और 12 कांस्य पदक हैं। इनमें स्वर्ण जीतने वाले दिव्यांगों ने न केवल विश्व भर में अपना नाम किया बल्कि अपने जीवन यापन के लिए बेहतर नकद राशि भी जीती।
चेतना संस्था के प्रबंधक कश्मीर सिंह ठाकुर ने बताया कि साल 2003 में संस्था की दिव्यांग बच्ची ने आयरलैंड में हुए वर्ल्ड समर गेम्स में दो स्वर्ण पदक हासिल किए थे। उन्हें 2 लाख की नकद राशि इनाम के तौर पर दी गई थी। वहीं चीन में हुए वर्ल्ड समर गेम्स 2007 में विक्रम चौहान ने वालीबाल में स्वर्ण जीता। 2013 में साउथ कोरिया में आयोजित वर्ल्ड विंटर गेम अल्पाइन स्किंग में पूजा कुमारी ने स्वर्ण, इसी में अनीता देवी ने भी स्वर्ण पदक हासिल कर विश्व भर में अपना नाम किया। 2017 में अस्ट्रिया में हुए वर्ल्ड विंटर गेम्स में शिवांजली और ऊषा ने स्वर्ण पदक जीते। इसमें शिवांजली को पांच लाख व ऊषा को 8 लाख नकद इनाम मिला। इसी ओलंपिक में पूजा देवी ने स्नो बोर्डिंग में स्वर्ण पदक के साथ आठ लाख नकद जीता। वहीं 2019 में आबू धाबी में साइकिलिंग प्रतियोगिता में शुभम कुमार ने स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ उन्हें पांच लाख की राशि नकद मिली। इन सभी का कहना है कि कोई भी व्यक्ति मन से दिव्यांग नहीं होना चाहिए। मन की मजबूती और हौसलों की उड़ान हो तो शरीर की दिव्यांगता कामयाबी के आड़े नहीं आती है।
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