एमएसएमई उद्यमों में तकनीकी उन्नयन को बढ़ावा देने के लिए कार्यशाला आयोजित
आगामी सप्ताह में किया जाएगा एमएसएमई इकाइयों का संयंत्र निरीक्षण
तकनीक अपनाकर छोटे उद्यम भी चरणबद्ध तरीके से बढ़ा सकते हैं उत्पादकता
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला उद्योग केंद्र बिलासपुर ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से स्मार्ट विनिर्माण और उद्योग 4.0 पर जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में जिला उद्योग केंद्र के जनरल मैनेजर जेआर अभिलाषी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
अभिलाषी ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य एमएसएमई उद्यमों को डिजिटल तकनीकों से जोड़ना और उनके उत्पादन ढांचे को आधुनिक बनाना है, ताकि वे बढ़ती औद्योगिक प्रतिस्पर्धा में सशक्त होकर खड़े हो सकें। कार्यशाला का संचालन सीईएल की विशेषज्ञ टीम ने किया।
विशेषज्ञों ने उद्यमियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, मशीन लर्निंग, क्लाउड-ईआरपी सिस्टम और ग्राहक संबंध प्रबंधन तकनीकों की उपयोगिता के बारे में बताया। समझाया कि स्मार्ट विनिर्माण तकनीकों के प्रयोग से उत्पादन क्षमता बढ़ती है, संसाधनों की बचत होती है, मशीनों की निगरानी आसान होती है और गुणवत्ता नियंत्रण में सुधार आता है। प्रतिभागियों को डिजिटल ट्विन मॉडल, स्वचालित असेंबली लाइन, कम लागत वाले स्वचालन मॉडल और स्मार्ट औद्योगिक डैशबोर्ड के प्रदर्शन भी दिखाए गए। विशेषज्ञों ने कहा कि छोटे उद्यम भी चरणबद्ध तरीके से तकनीक अपनाकर कम लागत में उत्पादकता बढ़ा सकते हैं। कार्यक्रम में जिले के उद्यमियों, प्लांट प्रबंधकों और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने तकनीकी लागत, उपयुक्त सेवा प्रदाताओं के चयन और स्वचालन की व्यावहारिक चुनौतियों से जुड़े सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने व्यावहारिक उदाहरणों के साथ समाधान दिया।
बैठक के अंत में निर्णय लिया गया कि आने वाले सप्ताहों में एमएसएमई इकाइयों का संयंत्र निरीक्षण किया जाएगा। इस दौरान डिजिटल तत्परता मूल्यांकन के तहत उन तकनीकों की पहचान की जाएगी, जिन्हें तुरंत लागू कर उद्यमों को लाभ पहुंचाया जा सकता है तथा भविष्य के लिए चरणबद्ध तकनीकी उन्नयन की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी। कार्यक्रम में मैनेजर मधु शर्मा, रैम्प सलाहकार आशुतोष शर्मा, सीईएल टीम से धीरज यादव और लघु उद्योग संघ के महासचिव इंदर ठाकुर मौजूद रहे।