बीबीएमबी ने तैयार किया टेंडर, एजेंसी से 20 वर्ष का अनुबंध
बिलासपुर के लुहणू क्षेत्र से होगी गाद निकासी की शुरुआत
रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल पर आधारित होगी पूरी योजना
सीधे प्रदेश सरकार को मिलेगी मूल्य के अंतर्गत मिलने वाली मूल रॉयल्टी
गोबिंद सागर झील से गाद निकालने को राज्य सरकार की मंजूरी
माइनिंग नियम 32/33 के तहत बीबीएमबी को दी गई अनुमति
झील में वर्तमान में करीब 150 एमसीएम गाद है जमा
उपलब्ध संसाधनों से सालाना 4 एमसीएम गाद निकाली जाएगी
सरोज पाठक
बिलासपुर। गोबिंद सागर झील में वर्षों से जमा हो रही गाद को हटाने की प्रक्रिया को लेकर बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया गया है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड को झील से गाद निकालने की औपचारिक मंजूरी दे दी है। राज्य सरकार की स्वीकृति के बाद बीबीएमबी ने गाद निकासी से संबंधित टेंडर दस्तावेज तैयार कर लिए हैं, जिन्हें शीघ्र जारी किया जाएगा।
इस परियोजना के तहत टेंडर लेने वाली एजेंसी के साथ 10 से 20 वर्ष का दीर्घकालिक अनुबंध किया जाएगा। राज्य सरकार की यह अनुमति हिमाचल प्रदेश के माइनिंग नियम 32/33 के तहत प्रदान की गई है। माइनिंग विभाग की स्वीकृति मिलने के साथ ही बीबीएमबी को अब गोबिंद सागर झील से गाद निकालने का कानूनी अधिकार मिल गया है। इससे पहले इस विषय पर केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों के साथ भी लगातार विचार-विमर्श किया गया था, ताकि तकनीकी और नीतिगत पहलुओं को स्पष्ट किया जा सके। बीबीएमबी के तकनीकी आकलन के अनुसार गोबिंद सागर झील में इस समय करीब 150 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) गाद जमा है। सतलुज नदी के माध्यम से हर वर्ष करीब 39 मिलियन क्यूबिक मीटर नई गाद झील में पहुंचती है, जिससे झील की भंडारण क्षमता पर असर पड़ता है। वर्तमान में उपलब्ध मशीनरी और संसाधनों के आधार पर सालाना लगभग चार मिलियन क्यूबिक मीटर गाद ही निकाली जा सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए गाद निकासी को दीर्घ अवधि की प्रक्रिया के रूप में अपनाया गया है। योजना के तहत गाद निकासी कार्य की शुरुआत लुहणू क्षेत्र से की जाएगी। इस क्षेत्र में गाद की अधिकता को देखते हुए इसे प्राथमिकता के आधार पर चुना गया है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से गोबिंद सागर झील के अन्य चिन्हित हिस्सों में भी गाद हटाने का कार्य किया जाएगा।
गाद निकासी की पूरी योजना रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल पर आधारित होगी। इसके तहत गाद के लिए एक न्यूनतम आरक्षित मूल्य तय किया जाएगा। इस मूल्य के अंतर्गत मिलने वाली मूल रॉयल्टी सीधे हिमाचल प्रदेश सरकार को प्राप्त होगी। यदि निविदा प्रक्रिया में कोई एजेंसी आरक्षित मूल्य से अधिक दर पर बोली लगाती है, तो अतिरिक्त राशि बीबीएमबी के माध्यम से भाखड़ा परियोजना से जुड़े भागीदार राज्यों के बीच साझा की जाएगी। बीबीएमबी के अधिकारियों के अनुसार गोबिंद सागर झील भाखड़ा बांध परियोजना का अहम हिस्सा है और इससे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश की सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन व्यवस्थाएं जुड़ी हुई हैं। गाद निकासी से झील की भंडारण क्षमता को बनाए रखने में मदद मिलेगी और जल प्रबंधन व्यवस्था को दीर्घकालिक दृष्टि से बेहतर बनाया जा सकेगा। संवाद
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ईओआई प्रक्रिया पूरी, अब टेंडर होगा जारी
बीबीएमबी ने इस परियोजना के लिए पहले ही एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट आमंत्रित की थी, जिसमें देश की कई निजी कंपनियों और एजेंसियों ने रुचि दिखाई। ईओआई के माध्यम से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर अब विस्तृत टेंडर दस्तावेज तैयार कर लिए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार अगले एक सप्ताह के भीतर टेंडर प्रकाशित होगा। इससके बाद निविदा प्रक्रिया शुरू होगी।
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केंद्र की अंतिम नीति लंबित
बीबीएमबी के अधिकारियों ने बताया कि गाद निकासी के विषय पर भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के साथ कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों में तकनीकी, कानूनी और पर्यावरणीय पहलुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया है तथा आवश्यक सुझाव भी प्राप्त किए गए हैं। हालांकि, अभी तक केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में कोई अंतिम राष्ट्रीय नीति अधिसूचित नहीं की गई है।
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लुहणू क्षेत्र से होगी गाद निकासी की शुरुआत
योजना के तहत गोबिंद सागर झील में गाद निकासी का कार्य लुहणू क्षेत्र से शुरू किया जाएगा। इस क्षेत्र में गाद की अधिकता को ध्यान में रखते हुए इसे प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया है। आगे चलकर अन्य चिन्हित क्षेत्रों में भी चरणबद्ध तरीके से गाद निकासी की जाएगी।