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Bilaspur News: राष्ट्रीय लोक अदालत में सड़क हादसे के मुआवजा मामले का निपटारा

Mon, 16 Mar 2026 11:38 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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अदालत से
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मृतक के माता-पिता को 13.99 लाख रुपये देने के आदेश
45 दिन में भुगतान नहीं हुआ तो देना होगा 9 प्रतिशत ब्याज
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राष्ट्रीय लोक अदालत में सड़क हादसे से जुड़े मुआवजा दावे का आपसी समझौते के आधार पर निपटारा कर दिया गया। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधीश बिलासपुर में पीठासीन न्यायाधीश की अदालत ने समझौते के आधार पर मामले का निपटारा करते हुए प्रतिवादी पक्ष को मृतक के माता-पिता को 13 लाख 99 हजार 999 रुपये की एकमुश्त क्षतिपूर्ति राशि देने के आदेश दिए हैं।
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मामले को राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह के लिए सूचीबद्ध किया गया था। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि आपसी सहमति से विवाद का समाधान कर लिया गया है। प्रतिवादी नंबर-1 की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को सूचित किया कि पीआरटीसी के जनरल मैनेजर की ओर से उन्हें समझौता करने के लिए अधिकृत किया गया है और पीआरटीसी मृतक के परिजनों को कुल 13,99,999 रुपये की राशि पूर्ण और अंतिम निपटारे के रूप में देने के लिए तैयार है। अदालत को यह भी बताया गया कि यह मुआवजा राशि आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से 45 दिनों के भीतर याचिकाकर्ताओं को अदा कर दी जाएगी। वहीं याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने अदालत को अवगत कराया कि उनके मुवक्किल इस समझौते से सहमत हैं और यदि मामले का निपटारा इस समझौते के आधार पर किया जाता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बयान अदालत में दर्ज किए गए और उन्हें केस रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया गया। अदालत ने यह पाया कि दोनों पक्षों के बीच हुआ समझौता स्वेच्छा से, बिना किसी दबाव या अनुचित प्रभाव के किया गया है और यह पूरी तरह वैधानिक है। इसके बाद अदालत ने समझौते के आधार पर दावे को स्वीकार करते हुए आदेश पारित किया कि प्रतिवादी नंबर-1, जनरल मैनेजर पीआरटीसी, याचिकाकर्ताओं को 13,99,999 रुपये की एकमुश्त क्षतिपूर्ति राशि 45 दिनों के भीतर अदा करें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो याचिकाकर्ता याचिका दायर करने की तारीख से लेकर राशि के वास्तविक भुगतान तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित उक्त राशि की वसूली के हकदार होंगे। अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता मृतक के माता और पिता हैं, इसलिए मुआवजे की राशि दोनों के बीच बराबर-बराबर यानी 50-50 अनुपात में बांटी जाएगी। उसी अनुपात में पूरी राशि उन्हें जारी की जाएगी। इसके अलावा अदालत ने मामले से संबंधित सभी लंबित आवेदनों का भी निपटारा कर दिया और दोनों पक्षों को अपने-अपने खर्च स्वयं वहन करने के निर्देश दिए। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद फाइल को रिकॉर्ड रूम में भेजने के आदेश भी जारी किए गए।
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