बरड़ गांव में आयोजित शिव महापुराण में कथा के दौरान आरती करते श्रद्धालु। संवाद
शिव-विवाह और भस्मासुर वध का किया भावपूर्ण वर्णन
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। घुमारवीं उपमंडल के बरड़ गांव में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन कथा वाचक पंडित जीवानंद शैल ने भगवान शिव से जुड़े कई महत्वपूर्ण पौराणिक प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
कथा को गति देते हुए उन्होंने सबसे पहले सती प्रसंग का उल्लेख किया गया। कथावाचक ने बताया कि राजा दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान होने पर माता सती ने स्वयं को योगाग्नि में समर्पित कर दिया। इस प्रसंग को सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो गए। कथावाचक ने कहा कि यह प्रसंग त्याग, आत्मसम्मान और भक्ति की पराकाष्ठा को दर्शाता है। सती माता के देह त्याग के बाद भगवान शिव के विरह और उनके गहन योग में लीन होने की कथा का भी विस्तार से वर्णन किया गया। कथावाचक ने कहा कि यह प्रसंग जीवन में वैराग्य और आत्मसंयम का संदेश देता है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की कथा सुनाई गई। कथावाचक ने इसे शक्ति और शिव के मिलन का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह प्रसंग जीवन में संतुलन, प्रेम और ऊर्जा के महत्व को दर्शाता है। विवाह प्रसंग के दौरान श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर कथा का श्रवण करते रहे। कथा में भस्मासुर वध का प्रसंग भी सुनाया गया। कथावाचक ने बताया कि भस्मासुर ने वरदान का दुरुपयोग कर स्वयं विनाश को आमंत्रित किया। इस कथा से यह संदेश मिलता है कि शक्ति का प्रयोग सदैव धर्म और मर्यादा में रहकर करना चाहिए। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। कथा के अंत में आरती और प्रसाद वितरण किया गया, जिससे वातावरण पूर्ण रूप से भक्तिमय हो गया।