-मत्स्य पालन का व्यवसाय शुरू कर बनाई खुद की पहचान
-बायोफ्लॉक तकनीक को समझकर शुरू किया मछली उत्पादन
-500 किलो मछली 125 रुपये प्रति किलो की दर से बेचकर कमाए साढ़े 62 हजार
-छह माह में सात टैंक में तैयार कर दी 1.5 मीट्रिक टन मछली
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले के छोटे से गांव छड़ोल में रहने वाले साहिल पुत्र नरेश कुमार ने यह साबित कर दिया है कि बड़े सपने देखने के लिए शहरों में रहना जरूरी नहीं। चंडीगढ़ की एक निजी कंपनी में काम करने वाले साहिल ने आत्मनिर्भर बनने, आर्थिक स्थिरता पाने के लिए स्वरोजगार की राह चुनी। मत्स्य पालन का व्यवसाय अपनाकर साहिल ने न केवल खुद को एक नई पहचान दी बल्कि अपने गांव को भी विकास और प्रेरणा की मिसाल बना दिया।
उनकी इस सफलता के पीछे मत्स्य विभाग, पीएम मत्स्य संपदा योजना का अभूतपूर्व सहयोग रहा। पीएम मत्स्य संपदा योजना के तहत साहिल ने 30 नवंबर 2023 को स्मॉल बायोफ्लॉक टैंक के निर्माण के लिए अनुदान का आवेदन किया। उन्होंने सात टैंक की योजना बनाई, जिनका व्यास 4 मीटर, ऊंचाई 1.5 मीटर थी। इस आवेदन की एक खास बात यह रही कि इसे मात्र 12 दिनों में स्वीकृत कर दिया गया, जो कि साहिल की मेहनत, सरकार की योजनाओं की प्रभावशीलता को दर्शाता है। इस त्वरित स्वीकृति ने साहिल को अपने मत्स्य पालन के व्यवसाय को तेजी से स्थापित करने में महत्वपूर्ण मदद प्रदान की। लगभग 7.50 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना के लिए सरकार ने 40 फीसदी (3 लाख रुपये) का अनुदान स्वीकृत किया। मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने साहिल को हर कदम पर तकनीकी सहायता प्रदान की। बायोफ्लॉक तकनीक की बारीकियों को समझाने से लेकर टैंकों के निर्माण, संचालन तक, हर स्तर पर मत्स्य विभाग ने उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। इसके साथ ही, विभाग ने साहिल को मछलियों के उचित बाजार तक पहुंचाने में भी मदद की।
मार्च 2024 में साहिल ने टैंकों का निर्माण कार्य शुरू किया। जब निर्माण आधा पूरा हो गया, तो उन्हें पहली अनुदान राशि के रूप में 1.20 लाख रुपये मिले। अप्रैल, मई 2024 में साहिल ने सात हजार पंगेसियस मछलियों का बीज संग्रहित कर अपने व्यवसाय की शुरुआत की। मई 2024 में टैंकों का निर्माण पूरा होने के बाद उन्हें शेष अनुदान राशि (1.80 लाख रुपये) प्रदान की गई। अगले पांच महीने में साहिल ने मछलियों के आहार, देखभाल में 2.50 लाख रुपये का निवेश किया। अक्तूबर 2024 में साहिल ने पहली बार अपनी मछलियों की बिक्री की। उन्होंने 500 किलोग्राम मछलियां 125 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचकर 62,500 रुपये की आय अर्जित की। यह उनकी मेहनत और सरकार की योजना के सफल क्रियान्वयन का प्रमाण है। वर्तमान में साहिल के टैंकों में 1.5 मीट्रिक टन मछलियां तैयार हैं, जिनकी बिक्री से लाखों रुपये का मुनाफा होने की संभावना है।