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Bilaspur News: निजी स्कूलों की बसों में बच्चों की सुरक्षा दांव पर

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- अग्निशमन यंत्र, फस्ट एड बॉक्स के बिना दौड़ाई जा रही बसें
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-निजी स्कूल प्रबंधन हर माह वसूलता है ट्रांसपोर्टेशन के नाम पर मोटी फीस

संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। जिले के कई निजी स्कूली बसों में अग्निशमन यंत्र नहीं हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। बसों में क्षमता से अधिक बच्चे भरना आम बात हो गई है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर किसी तरह के इंतजाम नहीं होने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। हाल की में ऊना जिले में एक निजी स्कूल बस में आग लगने की घटना सामने आ चुकी है। इसमें गनीमत रही कि बड़ी अनहोनी हुई। इसके बाद भी अन्य स्कूल बस चालकों ने सबक नहीं लिया।
जब भी कोई हादसा होता है तो बड़े-बड़े आदेश जारी कर पुख्ता इंतजाम करने की बात कही जाती है। जांच के दौरान कई वाहनों के चालान किए जाते हैं, लेकिन धीरे-धीरे समय बीतता जाता है और कानून की धज्जियां उड़ाने का काम फिर से शुरू हो जाता है। जिले में रोजाना दर्जनों स्कूल की बसें दौड़ती हैं। इन बसों में सैकड़ों विद्यार्थी सफर करते हैं। ऐसे में अगर आग लगने जैसी घटना किसी बस में हो जाए और बस में अग्निशमन यंत्र तक मौजूद न हों तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूल की बसों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के आदेश दिए हैं। इनमें बसों में अग्निशमन यंत्र, फस्ट एड बॉक्स के साथ-साथ खिड़कियों, शीशे और ग्रिल का हिना बहुत आवश्यक है। धरातल पर कुछेक बसों को छोड़कर नियम लागू नहीं किए गए हैं।
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ट्रांसपोर्टेशन के नाम पर हर माह बच्चों से फीस ली जाती है। कुछ स्कूलों में छुट्टियों के दौरान भी बच्चों से ट्रांसपोर्ट के नाम पर पैसा लिया गया है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर स्कूल प्रबंधक पैसा खर्च करने से इतराते हैं। स्कूल बसों में अग्निशमन यंत्र के अलावा, फस्ट एड बॉक्स भी उपलब्ध नहीं हैं। अगर किसी बच्चे को कोई चोट लग जाए तो उसे प्राथमिक उपचार देना संभव नहीं है। यहां सवाल उठता है कि आखिर क्यों सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहा है। इस संदर्भ में एसडीएम घुमारवीं गौरव चौधरी ने कहा कि स्कूल बसों की पासिंग के समय सुरक्षा प्रबंधों की पूरी जांच की जाती है। अगर फिर भी ऐसी बसें चल रही हैं तो इसकी जांच करवाई जाएगी।
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