घुमारवीं अस्पताल की गायनी ओपीडी में रोजाना 150 मरीज, बाहरी जिलों से भी पहुंच रहीं महिलाएं
बदलती जीवनशैली और खानपान बन रहे प्रमुख वजह
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। किशोरियों और युवतियों में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) और पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज (पीसीओडी) की समस्या बढ़ रही है। घुमारवीं अस्पताल की स्त्री रोग ओपीडी में भी पीरियड्स से जुड़ी दिक्कतों के साथ पीसीओएस-पीसीओडी के मामले सामने आ रहे हैं। उपचार के लिए बिलासपुर के अलावा कांगड़ा, चंबा और अंबाला समेत अन्य जिलों से भी महिला मरीज घुमारवीं अस्पताल पहुंच रही हैं।
चिकित्सकों के अनुसार बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधि की कमी, अनियमित खानपान और बढ़ता वजन किशोरियों में पीसीओएस की समस्या के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। घुमारवीं अस्पताल में सप्ताह में चार दिन स्त्री रोग विशेषज्ञ की ओपीडी होती है। पूरी गायनी ओपीडी में प्रतिदिन करीब 150 मरीजों की पर्चियां बनती हैं। इनमें गर्भावस्था और महिलाओं से जुड़ी अन्य समस्याओं के अलावा किशोरियों और युवतियों में पीरियड्स की अनियमितता के मामले भी सामने आते हैं।
पीसीओएस में पीरियड्स का अनियमित होना प्रमुख लक्षणों में शामिल है। लंबे अंतराल के बाद पीरियड्स आना, अचानक वजन बढ़ना, चेहरे पर अधिक मुंहासे होना, चेहरे या शरीर पर अनचाहे बाल बढ़ना और बाल झड़ना भी इसके लक्षण हो सकते हैं। कुछ किशोरियों में गर्दन या त्वचा पर काले और मोटे धब्बे भी दिखाई दे सकते हैं। कई बार किशोरियां इन लक्षणों को उम्र के साथ होने वाला सामान्य बदलाव समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। लगातार समस्या रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। हर अनियमित पीरियड पीसीओएस का संकेत हो, यह जरूरी नहीं है। ऐसे में खुद से बीमारी का निष्कर्ष निकालने के बजाय चिकित्सक की सलाह से जांच करवाना उचित रहता है। समय रहते समस्या की पहचान होने पर इसे नियंत्रित किया जा सकता है। समस्या को लंबे समय तक नजरअंदाज करने पर वजन बढ़ने, इंसुलिन प्रतिरोध, टाइप-2 डायबिटीज, उच्च रक्तचाप और प्रजनन संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए किशोरियों में लगातार पीरियड्स अनियमित रहने या अन्य लक्षण दिखाई देने पर समय पर जांच और उपचार जरूरी है।
कोट
पीसीओएस को समय रहते पहचानकर नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए जीवनशैली में सुधार सबसे महत्वपूर्ण है। नियमित शारीरिक गतिविधि और व्यायाम, संतुलित खानपान, पर्याप्त नींद और वजन को स्वस्थ सीमा में रखना मददगार होता है। जरूरत के अनुसार दवाएं और अन्य उपचार भी दिए जाते हैं। किशोरियों में लगातार पीरियड्स अनियमित रहने या अन्य लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
-डॉ. अनुपम शर्मा, बीएमओ, घुमारवीं