फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bilaspur News: मारपीट मामले के आरोपियों की पुनरीक्षण याचिका खारिज

विज्ञापन
विज्ञापन
अदालत से
विज्ञापन

घुमारवीं कोर्ट ने बरकरार रखा निचली अदालत का सम्मन आदेश
पुलिस कर्मी सहित अन्य आरोपियों को अब ट्रायल का करना होगा सामना
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, घुमारवीं, डॉ. मोहित बंसल की अदालत ने मारपीट के एक मामले में आरोपियों द्वारा दायर क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन (पुनरीक्षण याचिका) को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट द्वारा पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को अस्वीकार कर मामले को शिकायत के रूप में चलाने का फैसला पूरी तरह कानून सम्मत है। फैसले के बाद अब आरोपियों को बतौर अभियुक्त ट्रायल का सामना करना होगा।
मामले की जड़ें वर्ष 2015 से जुड़ी हैं। ग्राम पंचायत कोट, तहसील घुमारवीं निवासी महिला (अब दिवंगत) ने 4 मार्च 2015 को पुलिस थाना भराड़ी में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मुख्य आरोपी और उसके परिजनों ने उनके साथ मारपीट की और वे घातक हथियारों से लैस थे। आरोप के अनुसार, एक आरोपी के पास पिस्तौल थी, जबकि अन्य दराट और चाकू जैसे हथियार लिए हुए थे। पुलिस ने इस पर विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच के बाद पुलिस ने साक्ष्यों में विरोधाभास का हवाला देते हुए अदालत में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल कर दी। पुलिस का कहना था कि मेडिकल रिपोर्ट और मौखिक गवाहियों में तालमेल नहीं है। इसके खिलाफ शिकायतकर्ता ने अदालत में आपत्ति दर्ज कराई। 27 अक्टूबर 2018 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, कोर्ट नंबर-2, घुमारवीं ने पुलिस की रिपोर्ट को दरकिनार करते हुए आपत्ति को शिकायत मानकर आरोपियों को सम्मन जारी कर दिए। निचली अदालत के इस आदेश को आरोपियों ने सत्र न्यायालय में चुनौती दी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि एक आरोपी पुलिस विभाग में कार्यरत है और उसे रंजिश के चलते झूठे मामले में फंसाया गया है। साथ ही गवाहों के बयानों में विरोधाभास और पुरानी दुश्मनी का भी हवाला दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट को यह अधिकार है कि वह पुलिस की फाइनल रिपोर्ट को स्वीकार या अस्वीकार कर प्रोटेस्ट पिटीशन को शिकायत मानकर कार्यवाही आगे बढ़ा सकता है। कोर्ट ने माना कि शिकायतकर्ता, गवाहों के बयान तथा मेडिकल और एक्स-रे रिपोर्ट प्रथम दृष्टया मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार प्रदान करते हैं। रिवीजन कोर्ट का दायरा सीमित है और गवाहों की विश्वसनीयता की गहन जांच ट्रायल के दौरान ही होगी। अदालत ने पुनरीक्षण याचिका को गुण-दोष के आधार पर खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश को सही ठहराया। सभी पक्षों को 16 फरवरी 2026 को ट्रायल कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। चूंकि मूल शिकायतकर्ता का निधन हो चुका है, इसलिए उनकी बेटी इस कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ा रही हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत का आदेश न तो विकृत है और न ही कानून के विरुद्ध, इसलिए इसमें हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें