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Bilaspur News: चिट्टा बरामदगी मामले में आरोपी को राहत, कोर्ट ने दी जमानत

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अदालत ने कहा- बरामद मात्रा कमर्शियल श्रेणी में नहीं, जांच पूरी होने के बाद हिरासत उचित नहीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। स्वारघाट थाना में दर्ज 14.01 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामदगी के मामले में विशेष न्यायाधीश-2 बिलासपुर की अदालत ने एक आरोपी को सशर्त जमानत दे दी है। अदालत ने माना कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है तथा बरामद मादक पदार्थ की मात्रा व्यावसायिक (कमर्शियल) श्रेणी में नहीं आती। ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक न्यायिक हिरासत में रखना उचित नहीं होगा।
अदालत में दायर जमानत याचिका में कहा गया था कि आरोपी 29 जून 2026 से न्यायिक हिरासत में है। बचाव पक्ष ने दलील दी कि उसे झूठा फंसाया गया है, जांच पूरी हो चुकी है और अब उसकी पुलिस हिरासत की कोई आवश्यकता नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 की कठोर शर्तें इस मामले में लागू नहीं होतीं। राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि 29 जून को स्वारघाट पुलिस की स्पेशल डिटेक्शन टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर आरटीसी बैरियर के पास नाका लगाया था। शाम करीब 4:15 बजे चंडीगढ़ की ओर से आ रही एक मोटरसाइकिल को रुकने का संकेत दिया गया, लेकिन चालक भागने का प्रयास करने लगा। पुलिस ने उसे पकड़ लिया। तलाशी के दौरान मोटरसाइकिल की सीट के नीचे से एक पारदर्शी पॉलीथीन में 14.01 ग्राम चिट्टा बरामद होने का दावा किया गया। इसके बाद एनडीपीएस अधिनियम की धारा 21 और 29 के तहत मामला दर्ज किया गया।
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राज्य की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट का एक अन्य मामला भी लंबित है। ऐसे में उसके रिहा होने पर गवाहों को प्रभावित करने अथवा दोबारा नशे के कारोबार में शामिल होने की आशंका जताई गई।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि किसी आरोपी के खिलाफ एक अन्य मामला लंबित होना मात्र जमानत खारिज करने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि बरामद चिट्टा की मात्रा छोटी मात्रा से अधिक लेकिन व्यावसायिक मात्रा से कम है, इसलिए इस मामले में एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 के कठोर प्रावधान लागू नहीं होते। साथ ही जांच पूरी हो चुकी है और मुकदमे के जल्द समाप्त होने की संभावना भी कम है। ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना उचित नहीं होगा। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया जाता है तो पुलिस जमानत निरस्त कराने के लिए आवेदन कर सकती है।
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