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Bilaspur News: मंडी-भराड़ी चौक हमले में वाहन मालिक की जमानत नामंजूर

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संवाद न्यूज एजेंसी
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बिलासपुर। मंडी-भराड़ी चौक पर हुए जानलेवा हमले के चर्चित मामले में वारदात में कथित रूप से इस्तेमाल वाहन के मालिक की नियमित जमानत याचिका अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों की जांच जारी है। ऐसे में इस स्तर पर आरोपी को जमानत देना उचित नहीं होगा।
अदालत में दायर याचिका में आरोपी की ओर से कहा गया था कि वह निर्दोष है और उसका नाम केवल वाहन का मालिक होने के कारण मामले में जोड़ा गया है। उसका दावा था कि उसने अपनी गाड़ी सह-आरोपी को निजी कार्य के लिए दी थी और उसे इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि वाहन का इस्तेमाल किसी अपराध में किया जाएगा। याचिका में यह भी कहा गया कि वह जांच में सहयोग करता रहा है और उससे कोई बरामदगी शेष नहीं है। वहीं, राज्य की ओर से अदालत को बताया गया कि आठ जुलाई को मंडी-भराड़ी चौक के पास अदालत में पेशी के लिए आए घायल पर कुल्हाड़ी और डंडे से हमला किया गया था। आरोप है कि हमले के बाद आरोपी इसी वाहन से मौके से फरार हुए। पुलिस के अनुसार वाहन मालिक को मुख्य आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच पुरानी रंजिश की जानकारी थी और उसने जानबूझकर वाहन उपलब्ध कराया। अदालत ने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर ऐसे तथ्य मौजूद हैं, जिन्हें इस चरण में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वाहन आरोपी के नाम पर पंजीकृत है और उसने स्वयं स्वीकार किया है कि वारदात से दो दिन पहले उसने वाहन सह-आरोपी को दिया था। इसके अलावा घटना से एक दिन पहले दोनों के बीच करीब चार मिनट 37 सेकंड की फोन पर बातचीत होने का भी रिकॉर्ड जांच एजेंसी ने पेश किया है। व्हाट्सएप कॉल से संबंधित आईपीडीआर समेत अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच अभी जारी है।
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अदालत ने यह भी माना कि घायल को कुल 29 चोटें आई हैं और मेडिकल रिपोर्ट में कई चोटों को जानलेवा बताया गया है। मामले में प्रयुक्त हथियार बरामद किए जा चुके हैं, जिन्हें फोरेंसिक और डीएनए जांच के लिए भेजा जा रहा है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जांच अभी प्रारंभिक अवस्था में है, डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और आरोपी के विरुद्ध पूर्व के आपराधिक मामलों का भी उल्लेख किया गया है। इन परिस्थितियों में मामले की गंभीरता, जांच पर संभावित प्रभाव और उपलब्ध प्रथम दृष्टया सामग्री को देखते हुए नियमित जमानत देने का आधार नहीं बनता। इसके साथ ही अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आरोपी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निस्तारण तक सीमित हैं और मुकदमे के अंतिम निर्णय को प्रभावित नहीं करेंगी।
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