गर्भवती मां और बच्चों का समय सारणी के अनुसार टीकाकरण आवश्यक : डॉ. प्रवीण
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निश्चित दिन और दिनांक को टीकाकरण शिविर का आयोजित किया जाता है। उन्होंने सभी से आह्वान कि किया गर्भवती मां और बच्चों का समय सारणी के अनुसार टीकाकरण करवाएं।
उन्होंने बताया कि टीकाकरण कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान शीघ्र टीडी के दो टीके लगाए जाते हैं। इन टीकों को टीडी-1 और टीडी-2 कहा जाता है। दोनों टीकों में चार सप्ताह का अंतर रखना आवश्यक है। यदि गर्भवती महिला पिछले तीन साल के अंदर गर्भवती हो जाती है तो उसे टीडी का एक ही बूस्टर टीका लगाया जाता है। यदि पहले बच्चे के समय उसने टीडी के दो टीके लगवा लिए हैं तो उसे गर्भावस्था के दौरान केवल एक बूस्टर टीडी का टीका लगाना आवश्यक है। यह टीका मां और बच्चे को गलघोटू और टिटनेस बीमारी होने से बचाव करता है। टीकाकरण के इस वर्तमान कार्यक्रम में नवजात शिशुओं को बीसीजी का टीका जन्म के समय और एक साल की आयु तक लगाते हैं। हेपेटाइटिस बी 24 घंटे के भीतर और पोलियो जन्म के समय लगाया जाता है। बीसीजी का टीका टीबी रोग बचाव के लिए, हेपेटाइटिस बी का टीका लीवर से संबंधित और पोलियो का टीका पोलियो की बीमारी से बचाव के लिए लगाया जाता है। छह सप्ताह पर बच्चों को पोलियो, रोटावायरस, एफआईपीबी, पीसीबी और पेंटावेलेंट की एक-एक खुराक दी जाती है। 10 सप्ताह पर पोलियो, रोटावायरस, पेंटावेलेंट लगभग एक महीने के अंदर में दी जाती है। 14 सप्ताह पर पोलियो, रोटावायरस, एफआईपीबी, पीसीबी और पेंटावेलेंट के टीके दिए जाते हैं। नौ माह में विटामिन-ए की पहली खुराक, पीसीवी की बूस्टर खुराक दी जाती है। 16 से 24 माह पर बच्चों को पोलियो, एमआर की दूसरी खुराक और डीपीटी की पहली बूस्टर दी जाती है। पांच से छह साल पर डीपीटी की खुराक दी जाती है। 10 साल पर टीडी का एक टीका और 16 साल में भी टीडी का एक टीका लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि नियमित रूप से टीकाकरण कई प्रकार की जानलेवा बीमारियों से सुरक्षा करता है।