लंबे समय से टीसीपी एक्ट के खिलाफ संघर्षरत ग्रामीण किसान एवं जन संघर्ष समिति ने बुधवार को सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। इस मौके पर किसानों ने घुमारवीं में विरोध रैली निकालकर प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने प्रदेश सरकार होश में आओ, टीसीपी एक्ट को रद्द करो, काले कानून को वापिस लो जैसे नारे लगाकर सरकार के प्रति अपना रोष प्रकट किया।
इससे पूर्व संघर्ष समिति की बैठक समिति अध्यक्ष रणजीत सिंह गुलेरिया की अध्यक्षता में हुई। इसमें आंदोलन को तेज करने के लिए आगामी रणनीति तय की गई। समिति के महासचिव बृजलाल शर्मा, वरिष्ठ उपप्रधान रणजीत सिंह ठाकुर, मुख्य सलाहकार सोहन सिंह पटियाल और बीडी शर्मा ने बैठक को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से टीसीपी एक्ट का लगातार विरोध किया जा रहा है। इस बारे में कई बार प्रदेश सरकार और स्थानीय विधायक व सीपीएस राजेश धर्माणी को ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन आज तक उन्हें मात्र आश्वासन ही मिले हैं। हैरानी की बात है कि विधानसभा बजट सत्र में किसान हित में कोई कार्यवाही नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि हाल ही में टीसीपी एक्ट विभाग द्वारा जो घुमावीं विधानसभा क्षेत्र में कुछ गांवों को एक्ट से बाहर करने की बात कही गई है और हाइवे, राष्ट्रीय राजमार्ग और राजमार्गों से 150-150 मीटर तक टीसीपी एक्ट में रखने की बात कभी भी संघर्ष समिति को मंजूर नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि जब तक घुमारवीं चुनाव क्षेत्र की 14 पंचायतों के 62 गांवों को एक्ट से बाहर नहीं करते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। किसान प्रदेश सरकार के जनविरोधी निर्णयों की चक्की में पिस रहा है। सरकार का यह रवैया कतई सहन नहीं किया जाएगा। यदि सरकार समय रहते इस बारे ठोस कदम नहीं उठाती है, तो आंदोलन उग्र रूप धारण कर लेगा।
इस दौरान राम प्रकाश वशिष्ठ, संतराम कौंडल, हेमराज, सूबेदार सुरेश कुमार, दीनानाथ, कांता देवी, रतनी देवी, इंद्री देवी, ब्रह्मी देवी, राधा देवी, सत्या, शीला, मीना, निर्मला देवी, लीला देवी, ममता, नीलम, दलेल सिंह, लेखराम, जगदीश राम सहित कई ग्रामीण किसान उपस्थित रहे।
समस्या हल नहीं हुई, तो 15 को काले झंडे लेकर होगा प्रदर्शन
संघर्ष समिति के महासचिव बृजलाल शर्मा ने बताया कि घुमारवीं चुनाव क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को लेकर एसडीएम घुमारवीं के माध्यम से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को ज्ञापन सौंपा जा चुका है।
इसमें आवारा पशुओं और दूषित पेयजल समस्या सहित घुमारवीं अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों का न होना और 16 वर्षों से अल्ट्रासाउंड की मशीन चलाने के लिए रेडियोलॉजिस्ट विशेषज्ञ न होना जैसी समस्याएं शामिल हैं। समिमि ने चेतावनी दी है कि 15 अप्रैल तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो हिमाचल दिवस के दिन संघर्ष समिति मुंह पर काली पट्टियां बांधकर और हाथों में काले झंडे लेकर धरना-प्रदर्शन करेगी।