सरकारी स्कूलों में गिरते शिक्षा स्तर पर सख्त हुए हाईकोर्ट के आदेशों के बाद अब बच्चों को क्वालिटी एजूकेशन दी जाएगी। इसके लिए शिक्षा विभाग पूरी तरह से जुट गया है। शिक्षा उपनिदेशक (उच्च) ने स्कूलों का औचक निरीक्षण करने के साथ-साथ स्कूल प्रमुखों को दिशा-निर्देश दिए हैं। इसमें स्कूल की शैक्षणिक, खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों की समयसारणी को तय करने सहित अध्यापकों और अभिभावकों की जिम्मेवारी भी तय की है। इससे बच्चों को सरकारी स्कूलों में क्वालिटी एजूकेशन मिल सके।
विभाग ने टीचिंग डे बढ़ाने के लिए योजना तैयार की है। इसके तहत डिस्ट्रिक कैलेंडर ऑफ एक्टिविटी बनाया गया है। इसमें पूरे वर्ष स्कूलों में होने वाली गतिविधियों का समय तय किया गया है। जिला भर के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में एक ही समय पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जबकि, स्कूलों में होने वाले हाउस टेस्टों के परीक्षा पत्र स्कूल के अध्यापक तैयार करेंगे। परीक्षाओं की रिपोर्ट प्रत्येक बच्चे के घर तक पहुंचाई जाएगी। ताकि अभिभावकों को अपने बच्चे के बारे में पूरी जानकारी मिल सके। वहीं, सर्दियों में स्कूल प्रांगण में कक्षाएं लगाने की भी साफ मनाही कर दी गई है। क्योंकि प्रांगण में पढ़ाई सही तरीके से नहीं हो पाती। इसके अलावा स्कूल में पढ़ रहे हर बच्चे को मंच पर लाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ सके।
सरकारी स्कूलों में बढ़ी बच्चों की संख्या
जिला बिलासपुर में कुल 105 सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं। इनमें वर्तमान में करीब 28 हजार छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनकी संख्या पिछले वर्षों से करीब दो-ढ़ाई हजार बढ़ी है। विभाग छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास कर रहा है।
विभाग ने क्वालिटी एजूकेशन के तहत काम किया जा रहा है। समय-समय स्कूलों की व्यवस्थाओं को जानने के लिए औचक निरीक्षण किए जा रहे हैं। शिक्षा की गुणवत्ता के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
-रवि जंबाल, शिक्षा उपनिदेशक (उच्च), बिलासपुर।