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Bilaspur News: बिलासपुर नगर परिषद चुनाव से पहले सियासी भूचाल, कांग्रेस के किले में भाजपा की सेंध

Wed, 22 Apr 2026 11:10 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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दिग्गजों के पाला बदलने से बदले समीकरण, वार्ड 8, 9 में सीधी टक्कर तय
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नड्डा फैक्टर, संगठनात्मक कमजोरी और वार्ड स्तर पर उठापटक, चुनाव बना प्रतिष्ठा का संग्राम
नप बिलासपुर के कई वार्डों के दिग्गज कर रहे कांग्रेस छोड़ भाजपा में जाने की तैयारी

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नगर परिषद चुनाव की सरगर्मियों के बीच बिलासपुर में सियासी हलचल चरम पर है। इस बार का निकाय चुनाव केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों की साख, संगठन और रणनीति की सीधी परीक्षा बन गया है। मौजूदा हालातों में कांग्रेस के लिए राह कठिन होती दिख रही है, जबकि भाजपा लगातार बढ़त बनाती नजर आ रही है।
चुनाव से पहले कांग्रेस को तगड़े झटके लगे हैं। छात्र राजनीति से लेकर जिला संगठन तक सक्रिय रहे अजय चंदेल का भाजपा में शामिल होना पार्टी के युवा आधार में दरार के रूप में देखा जा रहा है। इसके साथ ही व्यवसायी एवं समाजसेवी अनिल हैप्पी का भाजपा में जाना शहरी वोट बैंक में बड़ा बदलाव ला सकता है। वहीं नगर परिषद वार्ड नंबर 10 की पूर्व पार्षद निर्मला राणा का पाला बदलना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। बताते चलें कि निर्मला राणा पहले भाजपा नेता अंगरीश को हराकर अपनी मजबूत पहचान बना चुकी हैं। वहीं अब उनका भाजपा में शामिल होने से उनका इस वार्ड से टिकट पक्का हो गया है। इसके साथ ही इस वार्ड में उनकी पकड़ भाजपा के लिए फायदेमंद रहेगी। ताजा राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भाजपा ने अपने नए चेहरों को सीधे चुनावी मैदान में उतारने की रणनीति बनाई है। जानकारी के अनुसार, अनिल हैप्पी को वार्ड नंबर 8 से भाजपा उम्मीदवार के रूप में उतारा जा सकता है, जहां उनकी सामाजिक पकड़ भाजपा के लिए मजबूत आधार बन सकती है। वहीं अजय चंदेल को वार्ड नंबर 9 से मैदान में उतारकर भाजपा ने कांग्रेस को सीधी चुनौती दे दी है। वार्ड नंबर 9 को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। लेकिन अजय चंदेल के व्यक्तित्व को देखते हुए इन्हें भाजपा ने अपने पाले में लेकर इस वार्ड से सत्ता की चाबी अपने हाथ ले ली है। इन दोनों वार्डों में मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का माना जा रहा है, क्योंकि दोनों नेता हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस समय मजबूत स्थिति में है। जेपी नड्डा का गृह क्षेत्र होने के कारण बिलासपुर में पार्टी की पकड़ लगातार मजबूत हुई है। वर्तमान विधायक त्रिलोक जम्वाल की सक्रियता भी भाजपा को फायदा पहुंचा रही है। हालांकि पूर्व विधायक सुभाष ठाकुर की भूमिका भी अहम मानी जा रही है, जिनकी आगामी रणनीति चुनावी समीकरण बदल सकती है। जहां भाजपा चुनावी तैयारी में आगे है, वहीं कांग्रेस अभी तक संगठनात्मक स्तर पर मजबूत नहीं हो पाई है। शहरी कांग्रेस का गठन न होना, नेतृत्व को लेकर असंतोष और गुटबाजी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। जिला और ब्लॉक स्तर पर हालिया नियुक्तियों के बावजूद जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ कमजोर नजर आ रही है। कार्यकर्ताओं में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बिलासपुर नगर परिषद पर लंबे समय तक कांग्रेस का दबदबा रहा है, लेकिन जेपी नड्डा की सक्रियता के बाद यह संतुलन धीरे-धीरे भाजपा की ओर झुकता गया। अब ताजा समीकरण उसी बदलाव को और स्पष्ट कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अभी और भी बड़े चेहरे पाला बदल सकते हैं। वार्ड नंबर 1 से 11 तक कई ऐसे नेता हैं जो चुनाव से पहले नया राजनीतिक रुख अपना सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिन और भी ज्यादा अहम साबित होंगे। कांग्रेस के लिए यह चुनाव साख बचाने की चुनौती बन गया है, जबकि भाजपा इसे अपने संगठनात्मक विस्तार का अवसर मान रही है। कुल मिलाकर, बिलासपुर नगर परिषद चुनाव इस बार बेहद रोमांचक और निर्णायक होने जा रहे हैं।
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