घुमारवीं (बिलासपुर)। नगर परिषद घुमारवीं में भाजपा और कांग्रेस से अपना कुनबा नहीं संभल रहा है। दोनों दलों के लिए अपने ही सिरदर्द बढ़ा रहे हैं। बतौर पार्टी प्रत्याशी दावेदारी जताने वाले पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में दोनों ओर से समर्थित उम्मीदवारों की घोषणा टेढ़ी खीर बनी है। नामांकन प्रक्रिया के दूसरे दिन भी भाजपा और कांग्रेस के समर्थित प्रत्याशियों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही है। पार्टी को दरकिनार करते हुए कुछ दावेदारों ने तो अपने नामांकन दाखिल कर दिए हैं।
वर्तमान नगर परिषद अध्यक्ष राकेश चोपड़ा ने खुद वार्ड नंबर दो से नामांकन दाखिल कर दिया है। उन्होंने अपनी बेटी निशा चोपड़ा का भी वार्ड नंबर तीन से नामांकन करवा दिया है। मौजूदा समय में चोपड़ा परिवार भाजपाई चोला ओढ़े हुए है। हालांकि, इस परिवार की पृष्ठभूमि कांग्रेस से भी जुड़ी रही है। अश्विनी रतवान भाजपा के कर्मठ कार्यकर्ताओं में से एक हैं, लेकिन पार्टी का फैसला आने से पहले ही अपने दम पर चुनावी ताल ठोक चुके हैं। भाजपा की तरह कांग्रेसी खेमे की तस्वीर भी इसी तरह की है। जिला महिला कांग्रेस सेवा दल की अध्यक्ष रीता सहगल ने भी वार्ड नंबर चार से अपना नामांकन दर्ज किया है। उन्होंने निर्दलीय जीत दर्ज कर कांग्रेस का हाथ थामा था। एक बार फिर से अपने दम पर मैदान में उतरी हैं। वार्ड नंबर छह से श्याम शर्मा जो मौजूदा समय जिला कांग्रेस कमेटी के महासचिव के पद पर भी कार्यरत हैं और पूर्व विधायक राजेश धर्माणी के घनिष्ठों में से एक हैं, उन्होंने भी अपना नामांकन दाखिल करवा दिया है। उनके वार्ड से पार्टी ने समर्थित प्रत्याशी की घोषणा कर दी है। इससे खफा श्याम शर्मा भी अपने स्तर पर चुनावी ताल ठोक रहे हैं।
वार्ड नंबर छह से खुद वर्तमान सरकार में मंत्री राजेंद्र गर्ग की साख दांव पर लगी है। दूसरी तरफ पूर्व विधायक राजेश धर्माणी भी नगर परिषद में अपनी खोई हुई साख वापस पाने के लिए मेेहनत कर रहे हैं। उक्त चारों उम्मीदवारों का पिछला इतिहास खंगाला जाए तो यह भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के करीबियों में से एक रहे हैं। अब सत्ता के गलियारों मे यह चर्चा जोरों पर चली है कि अगर यह जीत कर आते हैं तो क्या कांग्रेस और भाजपा में उन्हें वही स्थान दिया जाएगा या उचित दूरी तय मानी जाएगी।