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Bilaspur News: चरस तस्करी के मामले में पुलिस की फजीहत, अदालत ने दो आरोपियों को किया बरी

Fri, 05 Jun 2026 11:23 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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अदालत से
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जिस बैग से 149 ग्राम चरस पकड़ने का दावा था, उसे ही कोर्ट में पेश करना भूल गई पुलिस
अहम फैसला : विशेष न्यायाधीश की अदालत ने सुनाया दोषमुक्ति का आदेश
मामले से जोड़े गए दोनों मुख्य स्वतंत्र गवाह कोर्ट में पुलिस के दावों से मुकरे

संवाद न्यूज एजेंसी

बिलासपुर। नशीले पदार्थों की तस्करी के एक मामले में विशेष न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने दो आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया है। अदालत ने अपने विस्तृत फैसले में पुलिस की ढीली कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं और साफ कहा कि पुलिस आरोपियों के खिलाफ संदेह से परे दोष साबित करने में पूरी तरह नाकाम रही है। बरी किए गए दोनों आरोपियों में से मुख्य आरोपी पर चरस रखने और सह-आरोपी पर तस्करी की साजिश रचने का आरोप लगा था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 5 दिसंबर 2023 की रात करीब 9:40 बजे उप-निरीक्षक अपनी टीम के साथ निजी गाड़ी में गश्त पर थे और जब वे एचआरटीसी वर्कशॉप घुमारवीं के पास पहुंचे, तो उन्होंने पैदल गश्त के दौरान पीपल के पेड़ के चबूतरे के पास दो युवकों को संदिग्ध हालत में खड़े देखा, जिन्हें देखकर वे छिपने और भागने का प्रयास करने लगे। पुलिस का दावा था कि जब टीम उन्हें दबोचने आगे बढ़ी, तो एक आरोपी ने अपने हाथ में पकड़ा एक बैग मौके पर ही फेंक दिया, जिसके बाद पुलिस ने दोनों को काबू किया और पास ही अंडा स्टॉल के पास खड़े दो स्थानीय युवकों को बुलाकर स्वतंत्र गवाह के तौर पर शामिल किया। पुलिस के मुताबिक, जब फेंके गए बैग की तलाशी ली गई, तो उसके भीतर कपड़ों के बीच से एक नीले रंग के कैरी बैग में 149 ग्राम चरस बरामद हुई थी, जिसके बाद थाना घुमारवीं में एफआईआर दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया था। अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने पुलिस की थ्योरी की हवा निकाल दी, क्योंकि जांच अधिकारी ने अदालत में स्वीकार किया कि जिस मुख्य बैग से चरस निकालने का दावा किया गया था, उसे पुलिस ने कभी जब्त ही नहीं किया और न ही उसे केस प्रॉपर्टी बनाया, बल्कि उन्होंने वह बैग अगले दिन बिना किसी लिखित रिकॉर्ड या मेमो के आरोपियों के रिश्तेदारों को सौंप दिया था, जिस पर अदालत ने कहा कि जब मुख्य बैग ही गायब है, तो कस्टडी की महत्वपूर्ण कड़ी टूट जाती है। इसके अलावा, पुलिस ने जिन दो स्थानीय युवकों को इस पूरी बरामदगी का मुख्य चश्मदीद गवाह बनाया था, वे अदालत में मुकर गए और जज के सामने साफ कहा कि उनके सामने पुलिस ने कोई बैग चेक नहीं किया और न ही कोई चरस बरामद हुई, बल्कि पुलिस ने बाद में कागजों पर सिर्फ उनके हस्ताक्षर करवाए थे।
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अदालत ने अपने फैसले में यह भी नोट किया कि कथित घटना घुमारवीं के मुख्य बस स्टैंड पर हुई, जो एक खुला और सार्वजनिक स्थान है, जहां बरामद बैग के अंदर से कोई भी ऐसा दस्तावेज, आई कार्ड या आधार कार्ड नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि वह लावारिस बैग आरोपियों का ही था, जिससे आरोपियों का सचेत कब्जा साबित नहीं होता। इसके साथ ही मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के बयानों में भी भारी विरोधाभास दिखा, जहां कांस्टेबल ने कोर्ट में कहा कि पुलिस टीम ने अपनी जामा तलाशी गवाहों को दी थी और इसका मेमो भी बना था, जबकि कोर्ट फाइल से ऐसा कोई मेमो गायब था और आईओ ने बयान दिया कि ऐसा कोई सर्च हुआ ही नहीं था, वहीं आरोपियों की तलाशी में मोबाइल और पैसे मिलने को लेकर भी पुलिस टीम के बयान आपस में मेल नहीं खाए और री-सीलिंग के नियमों का पालन न होना भी तफ्तीश को संदेहास्पद बना गया। विशेष न्यायाधीश ने अपने फैसले में कड़ी टिप्पणी की और कहा कि एनडीपीएस कानून के तहत सजा का प्रावधान बेहद कड़ा है, इसलिए अदालत को साक्ष्यों को अत्यधिक बारीकी से देखना होता है और कानून के तहत केस को संदेह से परे साबित करने की शुरुआती जिम्मेदारी पूरी तरह पुलिस की होती है, लेकिन जब पुलिस बुनियादी तथ्यों को ही साबित नहीं कर पाई, तो आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से सह सम्मान बरी करते हुए उनके 20,000 के पर्सनल बॉन्ड रद्द करने और उनकी जमानतदारों को जिम्मेदारी से मुक्त करने के आदेश जारी किए हैं, जबकि जब्त चरस को वैधानिक अवधि के बाद नियमानुसार नष्ट करने को कहा गया है और कोर्ट ने फैसले की एक प्रति जिला मजिस्ट्रेट बिलासपुर को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी है।
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