संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कांग्रेस पार्टी के प्रमुख नेता एवं पूर्व मंत्री रामलाल ठाकुर ने कहा कि पिछले लगभग नौ वर्ष से अधिक समय से प्रधानमंत्री एवं भाजपा के सर्वोच्च नेता नरेंद्र मोदी ने एक बार भी भारत के लोगों को यह आभास नहीं होने दिया है कि वे केवल भाजपा के ही नहीं, बल्कि सारे देश के प्रधानमंत्री हैं।
रामलाल ठाकुर ने कहा कि अब जब मोदी का 10 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने को है और अगले संसदीय चुनाव का परिणाम सत्ता पक्ष व विपक्ष के बड़े-बड़े दावों के बावजूद भविष्य के गर्भ में छिपा है, तो देश के कितने ही राजनेता व बुद्धिजीवी, आम लोग यह आशा लगाए बैठे हैं कि प्रधानमंत्री किसी भी सार्वजनिक मंच से कम से कम इन 10 वर्ष में एक बार तो इस प्रकार भाषण करेंगे कि वे भाजपा के ही नहीं बल्कि सारे देश के प्रधानमंत्री हैं। ताकि उनके अब तक के भाषणों से निराश लोग कम से कम एक बार तो प्रसन्नता अनुभव कर सकें कि वे अपने प्रधानमंत्री का भाषण सुन रहे हैं न कि किसी भाजपा नेता का। कहा कि अब तक तो जब भी, कभी किसी भी सार्वजनिक मंच से सरकारी साधनों व धन बल पर प्रधानमंत्री ने भाषण दिया है।
उसमें बहुत बार उन्होंने सीधे रूप से और कई बार परोक्ष रूप से पूर्व कांग्रेस सरकारों व विरोधी नेताओं पर करारे प्रहार करके अधिकांश लोगों को निराश ही किया है। रामलाल ठाकुर ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि संविधान व लोकतंत्र की भावना अथवा आत्मा का सम्मान करते हुए क्या किसी भी प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, संसद और विधानसभा अध्यक्षों को सत्ताधारी दल के साथ जुड़े रहने के बावजूद क्या इन पदों पर आसीन रहते हुए अपनी पूर्व पार्टी के राजनीतिक हितों को साधने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। चुनाव की घोषणा होते ही राष्ट्रीय चुनाव आयोग सभी सत्ताधारी नेताओं को अपने राजनीतिक साधनों व सुविधाओं के दुरुपयोग पर रोक लगा देता है। किंतु इससे पहले भी क्या पूरे एक वर्ष तक उपरोक्त पदों पर बैठे नेताओं को अपने विरोधी दलों के विरुद्ध सत्ता का दुरुपयोग करते हुए अपनी पार्टी के राजनीतिक हितों के लिए प्रचार करने की आज्ञा होनी चाहिए? रामलाल ठाकुर ने कहा कि जब तक इस पर अंकुश नहीं लगाया जाता तब तक चुनाव आयोग यह नहीं कह सकता कि उसने पक्ष व विपक्ष को चुनाव लड़ने के लिए एक समान फील्ड व एक समान अवसर व सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।