फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bilaspur News: चेक बाउंस मामले में दोषी की अपील खारिज, ट्रायल कोर्ट के फैसले को ठहराया सही

विज्ञापन
विज्ञापन
तीन महीने की जेल और 4.50 लाख मुआवजे की सजा बरकरार
विज्ञापन

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं ने सुनाया निर्णय

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में दोषी की ओर से दायर अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत की ओर से कुल्लू निवासी दोषी को सुनाई गई तीन महीने की साधारण कारावास और 4.50 लाख रुपये के मुआवजे की सजा को बरकरार रखने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन

शिकायतकर्ता कंपनी शिमला ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड (घुमारवीं) के अनुसार कुल्लू निवासी ने साल 2018 में उनसे तीन पुरानी गाड़ियां कुल 18.50 लाख रुपये में खरीदी थीं। व्यक्ति ने कुछ राशि का भुगतान आरटीजीएस के जरिए किया, लेकिन शेष राशि के भुगतान के लिए 4 लाख रुपये का एक चेक जारी किया। कंपनी ने जब चेक को बैंक में लगाया, तो खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हो गया। आरोपी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सत्र न्यायालय में तर्क दिया था कि उसने कोई गाड़ी नहीं खरीदी और चेक कंपनी को नहीं, बल्कि किसी तीसरे व्यक्ति को दिया था। हालांकि, अदालत ने पाया कि आरोपी ने चेक पर अपने हस्ताक्षर और हैंडराइटिंग से इन्कार नहीं किया। जिसका आरोपी ने नाम लिया, उसने खुद गवाही देकर कंपनी के पक्ष में बयान दिया। आरोपी यह साबित करने में विफल रहा कि अगर उसने चेक किसी और को दिया था, तो उसने उसे वापस लेने या गलत इस्तेमाल रोकने के लिए क्या कदम उठाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून के तहत यह माना जाता है कि चेक कानूनी देनदारी चुकाने के लिए ही जारी किया गया है, जब तक आरोपी इसके विपरीत ठोस सबूत पेश न करे। आरोपी अपनी बेगुनाही का कोई भी साक्ष्य पेश करने में विफल रहा। इसलिए निचली अदालत की ओर से सुनाई गई सजा में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता। अदालत ने अपील को खारिज करते हुए दोषी को निर्देश दिया है कि वह सजा भुगतने के लिए तुरंत निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करे। यदि वह ऐसा नहीं करता है, तो कानून के अनुसार उसकी सजा को अमल में लाया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें