पेंशनरों को वेतनमान, डीए और मेडिकल बिलों का अब तक भुगतान नहीं
सरकार से 5 मई की कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव रद करने की मांग
फेडरेशन बोला, बेरोजगारों की अनदेखी सरकार के लिए खतरे की घंटी, एक्सटेंशन नीति भी अन्यायपूर्ण
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। हिमाचल प्रदेश पेंशनर फेडरेशन ने कहा कि राज्य सरकार के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 से बढ़ाकर 59 वर्ष करने का प्रस्ताव बेरोजगार युवाओं के साथ घोर अन्याय और धोखा होगा। फेडरेशन ने इस प्रस्ताव की कड़ी निंदा करते हुए मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों से 5 मई को होने वाली कैबिनेट बैठक में इसे निरस्त करने की मांग की है।
फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष हिम्मत राम शर्मा, महासचिव टीडी ठाकुर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमरनाथ धीमान, वित्त सचिव डीडी शर्मा सहित अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि यह प्रस्ताव लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन युवाओं ने वर्षों परीक्षाओं की तैयारी में लगाए, वे सरकार के इस तुगलकी फरमान से हताश और निराश हो रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि बेरोजगार युवाओं की अनदेखी सरकार के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती है। फेडरेशन ने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को एक्सटेंशन देने की नीति भी युवाओं के साथ अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं, तब सेवानिवृत्त लोगों को दोबारा मौका देना न्यायसंगत नहीं है। इससे पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों को भी नुकसान होता है।
पेंशनरों की समस्याओं की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए फेडरेशन ने बताया कि 2016 से 2021 तक सेवानिवृत्त कर्मचारियों को नए वेतनमान का लाभ नहीं मिला है, जिससे प्रत्येक कर्मचारी को औसतन 20 से 25 लाख रुपये की देनदारी लंबित है। इसके साथ ही करोड़ों रुपये के मेडिकल बिल और डीए की किस्तें भी रुकी पड़ी हैं। सरकार से मांग की है कि पेंशनरों के हितों की रक्षा के लिए विशेष बजट का प्रावधान किया जाए और मेडिकल बिलों तथा लंबित देयों का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने पर प्राथमिकता देने की अपील भी की है। उन्होंने कहा कि युवाओं और पेंशनरों की उपेक्षा प्रदेश के विकास और सामाजिक संतुलन के लिए घातक हो सकती है।