एम्स विशेषज्ञ ने कहा- सामान्य वजन होने पर भी मेटाबॉलिक समस्या संभव
कहा-अनियमित माहवारी को नजरअंदाज न करें
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) को आमतौर पर अनियमित माहवारी, चेहरे पर अधिक बाल और गर्भधारण में परेशानी से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह समस्या केवल प्रजनन स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। एम्स बिलासपुर की विशेषज्ञ हरप्रीत कौर के अनुसार पीसीओएस में इंसुलिन रेजिस्टेंस और अन्य मेटाबॉलिक बदलाव हो सकते हैं। इससे मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। उन्होंने बताया कि इसी व्यापक प्रभाव को देखते हुए पीसीओएस को पॉली एंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीएमओएस) के रूप में देखने पर जोर दिया जा रहा है। पीएमओएस में बीमारी के मेटाबॉलिक पक्ष पर भी ध्यान देने की जरूरत होती है।
हरप्रीत कौर ने बताया कि पीसीओएस में इंसुलिन रेजिस्टेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं देतीं, जिससे शरीर अधिक इंसुलिन बनाने लगता है। लंबे समय तक इंसुलिन का स्तर बढ़ा रहने से एंड्रोजन हार्मोन का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसका असर अंडोत्सर्जन पर पड़ने से माहवारी अनियमित हो सकती है और गर्भधारण में परेशानी आ सकती है। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं कि मेटाबॉलिक समस्या केवल अधिक वजन वाली महिलाओं में हो। सामान्य या कम वजन वाली महिलाओं में भी इंसुलिन रेजिस्टेंस और रक्त शुगर संबंधी गड़बड़ी हो सकती है। इसलिए सामान्य वजन को पूरी तरह स्वस्थ मेटाबॉलिक स्थिति का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
किशोरियों में समय पर पहचान जरूरी
अनियमित माहवारी, चेहरे पर अत्यधिक बाल या बिना स्पष्ट कारण वजन बढ़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है। स्थिति के अनुसार ब्लड शुगर, रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और हार्मोनल प्रोफाइल की जांच की जा सकती है। विशेषज्ञ ने कहा कि अनियमित माहवारी डॉक्टर से संपर्क करने का संकेत हो सकती है। इसके पीछे मौजूद मेटाबॉलिक बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। एम्स बिलासपुर में विशेषज्ञों की टीम समग्र चिकित्सकीय मार्गदर्शन और उपचार उपलब्ध करा रही है।