राष्ट्रीय नाटक उत्सव के अंतिम दिन किया पति गए री काठियावाड़ नाटक का मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के रौड़ा सेक्टर स्थित बहुउद्देशीय सांस्कृतिक भवन में राष्ट्रीय नाटक उत्सव के अंतिम दिन पति गए री काठियावाड़ नाटक का मंचन किया गया।इस नाटक का रूपांतरण सुधीर कुलकर्णी, संगीत एवं निर्देशन अजीत चौधरी ने किया। नाटक की प्रस्तुति स्पर्श नाट्य रंग दिल्ली ने की। यह कहानी महाराष्ट्र के पूना के गांव भांबुर्डा की है। कहानी में बताया है कि पूना के सूबेदार सर्जेराव सालाना वसूली के लिए लंबे समय के लिए काठियावाड़ जाते हैं। उनकी पत्नी जानकी समझदार, सुंदर, कर्तव्यनिष्ठ और पतिव्रता स्त्री है, जोकि अपने पति से प्रगाढ़ प्रेम करती है। पति के काठियावाड़ जाने की बात सुनकर वह उदास हो जाती है और पति से अपने को व्यस्त रखने के लिए कुछ काम करने की इच्छा जाहिर करती है। हंसी-2 में सर्जेराव अपनी गैर मौजूदगी में अपना वारिस और एक शीशमहल बनवाने की मांग रखते हैं, वो भी बिना अपने रुपये खर्च किए। हालांकि, यह सब वह मजाक में बोलते है, लेकिन फिर भी अपने पति के वचनों को किस प्रकार अपनी दासी मोहना से मिलकर वह पूरा करती है और अपने पतिव्रता पर आंच नहीं आने देती है। इस नाटक की यही कहानी है। दांपत्य जीवन पति-पत्नी के विश्वास की धूरी पर चलता है, अगर चूक हुई तो पारिवारिक कलह सभी को अपने में लपेट लेती है। हमारे पुरुष प्रधान समाज में परीक्षा सिर्फ महिलाओं को ही देनी पड़ती है, यह भी सच है। महिला गलती करे तो पतिता और पुरुष गलती करे तो क्षमा। नाटक गायन और संवादों के मिश्रण एवं अभिनेताओं के जीवंत अभिनय से हॉल में दर्शकों को तालियां बजाने के लिए मजबूर किया।
इन कलाकारों ने निभाए पात्र
नाटक में सूत्रधार की भूमिका कर्नल धीरेंद्र गुप्ता, शाहीर की दीपक राणा, जानकी की डॉ. शुचिता महेंदू, मोहना की नूपुर शंकर, सर्जेराव की अजीत चौधरी, जोरावर सिंह (बापू) की राजिंदर शर्मा (नानू), दीवानजी की सौरभ पांडे, नौकर की ज्ञान और विपिन ने, मंच के पीछे के प्रभाव में लाइट्स में जितेन्द्र नागर, मेकअप की राकेश, डिजाइन संगीत और निर्देशन की अजीत चौधरी ने निभाई।