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Bilaspur News: भजवाणी पुल के पुनर्निर्माण का रास्ता साफ, काम जल्द शुरू होने की उम्मीद

Fri, 29 Nov 2024 11:16 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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-41 जमीन मालिकों ने ज़मीन लोनिवि के नाम हस्तांतरित करने के कागज किए तैयार
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-38 अन्य हिस्सेदार दिसंबर अंत तक जमीन नाम करने की प्रक्रिया कर देंगे पूरी

संजय शर्मा
भगेड़ (बिलासपुर)। जिले के ऐतिहासिक भजवाणी पुल के पुनर्निर्माण की राह अब साफ हो गई है। लंबे समय से रुके हुए इस बहुप्रतीक्षित पुल के निर्माण में मुख्य बाधा बन रहे न्यायालय में विचाराधीन मामले को वादी द्वारा वापस लेने के बाद निर्माण कार्य को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
शुक्रवार को 41 जमीन मालिकों ने अपनी ज़मीन लोक निर्माण विभाग के नाम हस्तांतरित करने के दस्तावेज तैयार किए हैं। हालांकि, करीब 38 अन्य हिस्सेदारों को भी अपनी जमीन विभाग के नाम हस्तांतरित करनी है, जो कि दिसंबर माह के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।
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भजवाणी पुल निर्माण समिति के अध्यक्ष देशराज शर्मा ने कहा कि अन्य हिस्सेदारों द्वारा जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी। इससे पुल के निर्माण की प्रक्रिया तेज़ी से शुरू होने की संभावना है। केंद्र सरकार ने इस पुल के निर्माण के लिए केंद्रीय अधोसंरचना निधि से 103 करोड़ 31 लाख रुपये की राशि 10 अगस्त 2022 को मंजूर की थी। इसके बाद लोक निर्माण विभाग के प्रधान सचिव ने 30 अगस्त 2022 को स्वीकृति दी। 2022-23 के बजट में इस पुल के निर्माण के लिए 5 करोड़ 52 लाख रुपये, 2024-25 के बजट में 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। राज्य सरकार ने पुल के दोनों ओर 11 बीघा भूमि के अधिग्रहण के लिए 2 करोड़ 60 लाख रुपये का प्रावधान किया था। इसके लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू हो गई थी, लेकिन बीच में कुछ भूमि मालिकों ने अपनी जमीन देने से इंकार कर कोर्ट जाने का रुख किया। वहीं अब इनसे बात कर इसके निर्माण का रास्ता साफ किया गया है।
इस ऐतिहासिक पुल का निर्माण 1888 में तत्कालीन राजा अमरचंद ने एक अंग्रेज़ इंजीनियर की देखरेख में करवाया था। यह पुल कहलूर रियासत के लोगों के लिए जीवन रेखा था, क्योंकि हमीरपुर, धर्मशाला, कांगड़ा के लोग इसी पुल से बिलासपुर, किरतपुर, चंडीगढ़ और दिल्ली जाते थे। शुरुआत में इस पर छोटी बसों का संचालन भी होता था, लेकिन भाखड़ा बांध के निर्माण और गोबिंद सागर झील के बनने के बाद इस पुल का महत्व कम हो गया। वर्ष 1984 तक यह पुल बरकरार था, लेकिन उसके बाद रखरखाव न होने के कारण यह पुल अपना अस्तित्व खो बैठा। पुल के पुनर्निर्माण के बाद, बल्ह, भलवाणा, औहर, हीरापुर, बैरीदड़ोला, भगेड़, समोह, बैहनाजट्टां, गेहड़वीं, थुराण सहित जिले की सदर, घुमारवीं और झंडूता क्षेत्र की 40 पंचायतों के लोगों को इसका लाभ मिलेगा। इस ऐतिहासिक पुल का पुनर्निर्माण न केवल एक प्रतीकात्मक कदम होगा, बल्कि क्षेत्रीय यातायात को भी सुगम बनाएगा, जिससे स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिलेगी।
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कोट
पुल निर्माण के लिए जो भूमि अधिग्रहण की समस्या थी वो साफ हो गई है। 41 जमीन मालिकों ने विभाग के नाम जमीन करने के लिए दस्तावेज तैयार कर लिए हैं। अन्य कुछ भूमि मालिक बाहरी राज्यों में हैं वो भी जमीन देने के लिए तैयार हैं। जल्द ही जमीन विभाग के नाम कर इसका निर्माण शुरू किया जाएगा।



कृष्ण कांत चौहान, कार्यकारी अधिशासी अभियंता घुमारवीं
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