-हादसों से नहीं लिया जा रहा सबक, बड़े हादसे का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले की सड़कों पर ओवरलोड बसें दौड़ रही हैं। मालवाहक वाहन में भी जिंदगियों को दांव पर लगाकर लोगों को बैठाया जा रहा है। लगातार हो रहे हादसों से भी सबक नहीं लिया जा रहा है। ऐसे में कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
उत्तराखंड के अल्मोड़ा में हुई सड़क दुर्घटना में 36 लोगों की जान गई। हादसे के बाद सरकार द्वारा जांच के आदेश दिए गए। लेकिन समय रहते अगर जरूरी कदम उठाए गए होते तो शायद लोगों की जान बच सकती थी। जिले में भी बसों में ओवरलोडिंग बदस्तूर जारी है। ऐसे में कोई बड़ा हादसा कभी भी सामने आ सकता है। 32 सीटर बस में 60 से अधिक सवारियां भरी जा रही हैं। ओवरलोडिंग के दौरान शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी ज्यादातर भरे हुए होते हैं। लदरौर से घुमारवीं, बिलासपुर से घुमारवीं, बरठीं से घुमारवीं, जाहु से घुमारवीं, हमीरपुर से बिलासपुर, झंडूता से बिलासपुर रूटों पर दौड़ने वाली कई निजी बसों की यही हालत है। निजी बसों के अलावा पथ परिवहन निगम की बसों में भी ओवरलोडिंग देखी जा सकती है। प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। ओवरलोडिंग को रोकने के लिए दावे विभाग व प्रशासन व विभाग की ओर से किए जाते हैं लेकिन धरातल पर किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं हो रही है। ओवरलोडिंग के कारण कई लोगों की जाने जा चुकी हैं। हादसों के समय जांच कमेटियां गठित की जाती हैं। कुछ दिनों तक सड़कों पर चालान आदि की प्रक्रिया शुरू होती है। समय बीतता जाता है और कानून की अनुपालन करने के नियम कागजों तक सीमित हो जाती है। बसों की खिड़कियां खुली होती हैं। सवारियां दरवाजों की ओर लटकी हुई होती हैं। निजी, सरकारी बसों के अलावा स्कूल में बच्चों को ले जाने व लाने वाले कई वाहनों में भी इसी प्रकार से ओवरलोडिंग देखी जा सकती है।
उधर, डीएसपी घुमारवीं चंद्रपाल ने कहा कि ओवरलोडिंग करने वालों के खिलाफ समय समय पर कार्रवाई की जाती है। विशेष अभियान शुरू कर ओवरलोडिंग करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।