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Bilaspur News: अलग रह रही पीड़ित महिला को दो कमरों का घर, 10000 रुपये हजार महीना देने के आदेश

Thu, 18 Dec 2025 11:40 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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कहा- सम्मानजनक जीवन जीने लायक होनी चाहिए भरण–पोषण की राशि, आवास व्यवस्था
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घरेलू हिंसा मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने पीड़ित महिला को दी राहत

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घरेलू हिंसा के एक मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, घुमारवीं (कैंप बिलासपुर) की अदालत ने निचली अदालत के आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए पीड़ित महिला और उसके बच्चों को अतिरिक्त राहत प्रदान की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भरण–पोषण की राशि और आवास की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे पीड़ित महिला सम्मानजनक जीवन जी सके।
यह मामला संरक्षण अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत दायर याचिका से संबंधित है। पीड़ित महिला ने अदालत में बताया था कि विवाह के बाद से उसे शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उसके अनुसार उसे न तो समुचित भरण–पोषण मिला और न ही रहने की पर्याप्त व्यवस्था की गई। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि बच्चों की पढ़ाई और इलाज का खर्च भी उसी को उठाना पड़ रहा है, जबकि पति सक्षम होते हुए भी परिवार के भरण–पोषण की जिम्मेदारी नहीं निभा रहा। मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने 24 मार्च 2022 को आदेश पारित करते हुए पीड़ित महिला को घरेलू हिंसा से संरक्षण, एक कमरे का आवास, 2,500 रुपये प्रतिमाह भरण–पोषण, 5,000 रुपये मुआवजा देने के निर्देश दिए थे। हालांकि ,पीड़ित पक्ष ने इस आदेश को अपर्याप्त बताते हुए सत्र न्यायालय में अपील दायर की। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने वीरवार को अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि वर्तमान महंगाई और परिस्थितियों को देखते हुए 2,500 रुपये प्रतिमाह की राशि में महिला और उसके बच्चों का भरण–पोषण संभव नहीं है। अदालत ने माना कि पति एक सक्षम व्यक्ति है और उस पर पत्नी व बच्चों की देखभाल की कानूनी जिम्मेदारी है। इस आधार पर अदालत ने भरण–पोषण की राशि बढ़ाकर 3,500 रुपये प्रतिमाह कर दी, जो अपील दायर करने की तिथि से देय होगी।
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अदालत ने आवास व्यवस्था पर भी अहम टिप्पणी की। रिकॉर्ड के अनुसार पति के पास पर्याप्त कमरे उपलब्ध हैं, ऐसे में पीड़ित महिला और बच्चों का केवल एक कमरे में रखना उचित नहीं है। न्यायालय ने आदेश दिया कि अब उन्हें दो कमरे, रसोई, बाथरूम और शौचालय सहित आवास उपलब्ध कराया जाए। हालांकि, अदालत ने निचली अदालत द्वारा दिए गए 5,000 रुपये के मुआवजे के आदेश को बरकरार रखा और उसमें किसी प्रकार का संशोधन आवश्यक नहीं माना। अपने फैसले में अदालत ने यह भी कहा कि घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में अदालत का उद्देश्य पीड़ित महिला को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन उपलब्ध कराना है, न कि उसे न्यूनतम साधनों तक सीमित करना। इस निर्णय को घरेलू हिंसा के मामलों में पीड़ित महिलाओं के अधिकारों को मजबूती देने वाला महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।
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