जुखाला। श्री गुग्गा जाहर वीर जी की सेवा (कार) के चौथे दिन बरमाणा की भक्त मंडली ने घर-घर पहुंचकर उनकी गाथा का गुणगान किया। मंडली के सदस्यों ने श्रद्धालुओं को गुग्गा जाहर वीर के जीवन, वीरता और धर्म रक्षा से जुड़े प्रसंग सुनाए। गाथा के दौरान माहौल भक्तिमय बना रहा और श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ गुग्गा जाहर वीर जी का स्मरण किया।
भक्त मंडली के सदस्यों ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार श्री गुग्गा जाहर वीर जी का जन्म करीब एक हजार वर्ष पहले राजस्थान के ददरेवा में हुआ था। उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अनेक युद्ध लड़े। मान्यता के अनुसार वह नीले घोड़े की सवारी करते थे, जिसका नाम भौरा ताजी बताया जाता है। मंडली ने बताया कि गुग्गा जाहर वीर जी के गुरु बाबा गोरखनाथ और माता का नाम बाछल था। उनका विवाह रानी श्रीयल से हुआ था, जो राजा संजय की पुत्री थीं।
उनकी गाथा में माता बाछल की बहन रानी काछल और उनके पुत्र आर्जन-सर्जन से जुड़े प्रसंग भी सुनाए जाते हैं। गाथा के दौरान गुग्गा जाहर वीर जी के मक्का-मदीना जाने और वहां से धरती में समा जाने से जुड़ा प्रसंग भी श्रद्धालुओं को सुनाया गया।