दवा लेने के बाद सभी बच्चे स्वस्थ, कहीं से भी प्रतिकूल प्रभाव की सूचना नहीं
28 फरवरी को मॉप-अप राउंड में छूटे बच्चों को किया जाएगा कवर
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार को व्यापक स्तर पर अभियान चलाया। इस दौरान 1 से 19 वर्ष की उम्र के बच्चों को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई। अभियान का उद्देश्य बच्चों को पेट के कीड़ों के संक्रमण से बचाना, कुपोषण की समस्या को कम करना तथा उनके शारीरिक और मानसिक विकास को बेहतर बनाना है।
स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त प्रयास से जिले के सभी सरकारी व निजी स्कूलों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों में यह अभियान सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। बच्चों को दवा खिलाने के साथ-साथ स्वच्छता, हाथ धोने की आदत, साफ पानी पीने और खुले में शौच से बचने के प्रति भी जागरूक किया गया। अभियान के तहत जिले में कुल 94,965 बच्चों को कृमि मुक्ति की दवा दी गई, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 97 प्रतिशत है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह उपलब्धि सभी विभागों के समन्वय और फील्ड स्टाफ के प्रयासों से संभव हो सकी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शशि दत्त शर्मा ने बताया कि दवा वितरण के बाद पूरे जिले में बच्चों की निगरानी की गई और सभी बच्चों की तबीयत सामान्य रही। कहीं से भी किसी प्रकार की प्रतिकूल प्रतिक्रिया या स्वास्थ्य संबंधी समस्या की सूचना नहीं मिली, जिससे अभिभावकों और विभागीय टीमों ने राहत महसूस की। विशेषज्ञों के अनुसार पेट में कीड़े होने से बच्चों में खून की कमी, कमजोरी, थकान, भूख कम लगना तथा पढ़ाई में ध्यान न लगने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। लंबे समय तक संक्रमण रहने पर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नियमित रूप से कृमि मुक्ति की दवा लेने से इन समस्याओं से बचाव संभव है।
जो बच्चे किसी कारणवश इस अभियान में दवा लेने से वंचित रह गए हैं, उन्हें 28 फरवरी 2026 को आयोजित मॉप-अप राउंड के दौरान कवर किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को इस दिन अवश्य दवा दिलवाएं, ताकि कोई भी बच्चा कृमि मुक्ति कार्यक्रम से वंचित न रहे। सीएमओ ने कहा कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान बच्चों के स्वस्थ भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और विभाग आगे भी ऐसे कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से जारी रखेगा, जिससे कृमि मुक्त समाज के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।